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भारतीय सेना में नए युग की शुरुआत: जनरल धीरज सेठ ने संभाली थल सेना की कमान

राघवेंद्र प्रताप सिंह: भारतीय सैन्य इतिहास और देश की सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। जनरल धीरज सेठ ने आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना के नए प्रमुख (Chief of the Army Staff – COAS) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है. उन्होंने तत्कालीन सेना प्रमुख का कार्यकाल पूरा होने के बाद 1.3 मिलियन की विशाल सैन्य शक्ति वाली भारतीय सेना की कमान अपने हाथों में ली है. देश की सीमाओं पर जारी मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों और तकनीकी आधुनिकीकरण के दौर में जनरल धीरज सेठ का यह कार्यभार संभालना बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।

‘विजय’ (VIJAY) रोडमैप का अनावरण

कमान संभालते ही नए थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना की भविष्य की रणनीतियों और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए अपने महत्वाकांक्षी ‘विजय’ (VIJAY) रोडमैप का अनावरण किया है. इस रोडमैप के तहत सेना को 21वीं सदी की आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत युद्धक शक्ति में बदलने पर विशेष बल दिया गया है:

* अत्याधुनिक तकनीक का एकीकरण: युद्ध के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तकनीक, साइबर सुरक्षा और उन्नत संचार प्रणालियों को सेना के अग्रिम मोर्चों पर तैनात किया जाएगा।
* आत्मनिर्भरता (Make in India): रक्षा उपकरणों के मामले में विदेशी निर्भरता को कम करने और घरेलू रक्षा निर्माण को बढ़ावा देने की नीतियों को ‘विजय’ रोडमैप के तहत अभूतपूर्व गति दी जाएगी।

उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सुरक्षा को मजबूती

जनरल धीरज सेठ का अनुभव वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारत की रक्षात्मक और आक्रामक स्थिति को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा. ऐसे समय में जब पड़ोसी सीमाओं पर हाइब्रिड वॉरफेयर और भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है, नए सेना प्रमुख के नेतृत्व में भारतीय सेना की परिचालन तैयारियों (Operational Readiness) और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं (Rapid Response Capabilities) को और अधिक धारदार बनाया जा रहा है।

जनरल धीरज सेठ का थल सेना प्रमुख के रूप में आना भारतीय सेना को और अधिक आधुनिक, चुस्त और घातक बल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. उनका यह विजनरी रोडमैप न केवल देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करेगा, बल्कि वैश्विक पटल पर एक सशक्त और आधुनिक सैन्य महाशक्ति के रूप में भारत की साख को और अधिक मजबूत करेगा.