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दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान: राम मंदिर दान विवाद और महाकाल मंदिर भूमि मुद्दे पर ‘उज्जैन से अयोध्या’ तक करेंगे पदयात्रा

अभिषेक सिंह/ भोपाल/उज्जैन: राम मंदिर दान विवाद और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन का मुद्दा राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह से छा चुका है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इन मामलों को लेकर सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दो प्रमुख धार्मिक विवादों—अयोध्या राम मंदिर दान विवाद और उज्जैन के महाकाल मंदिर की जमीन के मुद्दे—को एक साथ उठाते हुए ‘उज्जैन से अयोध्या’ तक एक विशाल पदयात्रा निकालने की घोषणा की है।

दिग्विजय सिंह ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले दल अब धार्मिक परिसरों और आस्था के केंद्रों में भी भ्रष्टाचार को पनपने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्रों में हो रही कथित हेराफेरी और उज्जैन में महाकाल मंदिर से जुड़ी बेशकीमती जमीनों के व्यावसायिक दुरुपयोग की खबरें सीधे तौर पर सनातन धर्म और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हैं।

अपनी ‘उज्जैन से अयोध्या’ पदयात्रा का खाका पेश करते हुए कांग्रेस नेता ने बताया कि यह यात्रा भगवान शिव की नगरी उज्जैन (मध्य प्रदेश) से शुरू होकर भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या (उत्तर प्रदेश) तक जाएगी। इस पदयात्रा के दौरान वह और उनके समर्थक रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों में रुककर आम जनता को “धर्म के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार” के बारे में जागरूक करेंगे।

कांग्रेस का यह कदम स्पष्ट रूप से भाजपा के सबसे मजबूत ‘हिंदुत्व’ के किले में सेंध लगाने की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। दिग्विजय सिंह, जो पहले भी अपनी लंबी नर्मदा परिक्रमा के लिए चर्चा में रहे हैं, इस पदयात्रा के माध्यम से धार्मिक जवाबदेही और पारदर्शिता को एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य और केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल इस यात्रा की घोषणा पर कोई तीखी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इससे सियासी माहौल का गर्म होना तय है।