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ग्रामीण विकास को नई दिशा: 4.35 लाख करोड़ के हस्तांतरण पर पंचायती राज मंत्रियों की राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: ग्रामीण भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से नई दिल्ली में आयोजित पंचायती राज मंत्रियों की उच्च स्तरीय राष्ट्रीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस कार्यशाला का मुख्य फोकस 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों को 4.35 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक वित्तीय हस्तांतरण को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारना था।

केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक में विभिन्न राज्यों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला के दौरान इस भारी-भरकम राशि के पारदर्शी आवंटन और इसके सही उपयोग के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया।

चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में पंचायतों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय उनके अपने राजस्व स्रोतों (Own Source of Revenue) को विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके तहत स्थानीय संपत्तियों, बाजारों और सेवाओं से कर संग्रह प्रणाली को बेहतर बनाने पर रणनीति साझा की गई। इसके अतिरिक्त, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल और डिजिटल साक्षरता जैसे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू करने के लिए इन निधियों के उपयोग का खाका खींचा गया।

केंद्र सरकार ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस अनुदान का पैसा सीधे ग्राम पंचायतों के खातों में जाना चाहिए, ताकि बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके। इस कार्यशाला के निष्कर्ष देश भर की ढाई लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के विकास और पारदर्शी सुशासन में एक नया मील का पत्थर साबित होंगे।T