Trending

ट्रैफिक नियमों में बड़ा बदलाव: 5 बार नियम तोड़ने पर रद्द होगा ड्राइविंग लाइसेंस, 45 दिन में चालान नहीं भरा तो सेवाएं होंगी ब्लॉक

पल्लवी श्रीवास्तव/  नई दिल्ली: देश भर में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात व्यवस्था में अनुशासन लाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने मोटर वाहन नियमों में कई बड़े और सख्त बदलाव किए हैं। इन नए नियमों के तहत अब सड़क पर मनमानी करने वाले वाहन चालकों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। केंद्र सरकार द्वारा जारी नई ‘5-स्ट्राइक पॉलिसी’ और ई-चालान भुगतान के नियमों ने ट्रैफिक उल्लंघनकर्ताओं के लिए बचने के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं।

क्या है ‘5-स्ट्राइक पॉलिसी’?

नए नियमों के अनुसार, यदि कोई भी वाहन चालक एक वर्ष के भीतर 5 या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन (जैसे रेड लाइट जंप करना, ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट/सीटबेल्ट गाड़ी चलाना या मोबाइल पर बात करना) करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस (DL) तुरंत प्रभाव से 3 महीने के लिए निलंबित या पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल जुर्माना भर देने से आपका ‘स्ट्राइक’ (रिकॉर्ड) खत्म नहीं होगा। लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में चालक को दोबारा लर्नर लाइसेंस की शुरुआत से पूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

45 दिन की सख्त समय सीमा

इसके अलावा, ई-चालान भुगतान प्रणाली को भी बेहद सख्त बना दिया गया है। अब किसी भी ट्रैफिक उल्लंघन के बाद, वाहन मालिक को चालान का भुगतान करने या उसे चुनौती देने के लिए केवल 45 दिन का समय मिलेगा। यदि इस अवधि के भीतर चालान जमा नहीं किया जाता है, तो सिस्टम स्वतः ही वाहन से जुड़ी सभी आरटीओ (RTO) सेवाओं को ब्लॉक कर देगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि बिना पुराना चालान भरे आप न तो अपनी गाड़ी बेच (RC Transfer) सकेंगे, न बीमा रिन्यू करा पाएंगे, और न ही अपनी गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट बनवा सकेंगे।

एआई (AI) कैमरों से होगी निगरानी

यातायात पुलिस के अनुसार, इस पूरे सिस्टम को देश भर के सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे और महानगरों में लगे अत्याधुनिक एआई (AI) और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों से जोड़ दिया गया है। अब पुलिस के बिना भी कोई भी उल्लंघन सीधे सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। यहां तक कि कार में पीछे बैठे यात्रियों द्वारा सीटबेल्ट न लगाने पर भी कैमरे तुरंत चालान काट देंगे। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ सरकार के इस कदम को “सड़क सुरक्षा-जीवन रक्षा” अभियान के तहत एक गेम-चेंजर मान रहे हैं।