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वैश्विक मंच पर भारत की डिजिटल कूटनीति: जिनेवा में ‘एआई गवर्नेंस’ पर संयुक्त राष्ट्र की पहली ऐतिहासिक वार्ता में भारत करेगा नेतृत्व

विवेक ओझा/ नई दिल्ली/जिनेवा: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के भविष्य और इसके वैश्विक नियमन (Regulation) को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने एक बड़ा कदम उठाया है। स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आज से ‘एआई गवर्नेंस’ (AI Governance) पर संयुक्त राष्ट्र की पहली और ऐतिहासिक वैश्विक वार्ता शुरू हो रही है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत एक प्रमुख भूमिका निभाने जा रहा है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह इस शिखर वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और डिजिटल दुनिया को लेकर भारत का स्पष्ट विजन दुनिया के सामने रखेंगे।

जैसे-जैसे जेनरेटिव एआई (Generative AI), डीपफेक (Deepfake) और ऑटोनोमस सिस्टम्स का दायरा बढ़ रहा है, पूरी दुनिया इन तकनीकों के नैतिक उपयोग और साइबर सुरक्षा को लेकर चिंतित है। जिनेवा में हो रही इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा ‘ग्लोबल एआई फ्रेमवर्क’ तैयार करना है, जो तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ मानव अधिकारों, निजता और डाटा सुरक्षा की भी गारंटी दे सके। भारत, जो ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की एक मजबूत आवाज है, इस सम्मेलन में एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करने की तैयारी में है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह अपने संबोधन में स्पष्ट करेंगे कि एआई का विकास और इसके लाभ केवल कुछ विकसित पश्चिमी देशों या बड़ी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। भारत ‘एआई फॉर ऑल’ (AI for All) की नीति की वकालत करेगा, जिसका अर्थ है कि शिक्षा, कृषि, और स्वास्थ्य सेवा में एआई का उपयोग आम आदमी के जीवन स्तर को सुधारने के लिए किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही, भारतीय प्रतिनिधिमंडल डीपफेक तकनीक से चुनाव प्रक्रियाओं और लोकतंत्र को होने वाले खतरों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाएगा। भारत संयुक्त राष्ट्र से एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय संधि (International Treaty) की मांग करेगा, जिसके तहत एल्गोरिदम में पारदर्शिता हो और एआई द्वारा किए गए किसी भी अपराध या दुष्प्रचार के लिए एक स्पष्ट जवाबदेही (Accountability) तय की जा सके। यह सम्मेलन यह तय करेगा कि आने वाले दशकों में दुनिया एआई को एक ‘वरदान’ की तरह इस्तेमाल करती है या यह एक अनियंत्रित ‘हथियार’ बन जाता है।