वैश्विक कूटनीति का अहम पड़ाव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पहुंचेंगे मॉस्को, पुतिन के साथ रक्षा और ऊर्जा समझौतों पर होगी महामंथन

विवेक ओझा/ नई दिल्ली/मॉस्को: बदलती वैश्विक भू-राजनीति और पश्चिमी देशों के दबाव के बीच भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति (Independent Foreign Policy) का एक और बड़ा प्रमाण दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (8 जुलाई) अपनी दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रूस की राजधानी मॉस्को पहुंच रहे हैं। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला द्विपक्षीय रूस दौरा है। मॉस्को में वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ 22वें भारत-रूस वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन (Annual Bilateral Summit) में हिस्सा लेंगे।
रक्षा संबंधों पर खास फोकस
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने सैन्य और रणनीतिक संबंध रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के कारण रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है। इस शिखर वार्ता में सबसे अहम मुद्दा रक्षा उपकरणों की निर्बाध आपूर्ति का रहेगा। भारत रूस से खरीदे गए S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की बाकी बची हुई रेजिमेंट्स की जल्द डिलीवरी की मांग करेगा। इसके अलावा, सुखोई फाइटर जेट्स और टी-90 टैंकों के स्पेयर पार्ट्स के ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) के तहत भारत में ही संयुक्त निर्माण को लेकर भी बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है।
ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार घाटा
रक्षा के बाद इस यात्रा का दूसरा सबसे बड़ा एजेंडा ऊर्जा (Energy) और व्यापार है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस भारत को रियायती दरों (Discounted prices) पर कच्चे तेल की आपूर्ति कर रहा है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी मजबूत हुई है। प्रधानमंत्री मोदी इस रियायती तेल आपूर्ति को दीर्घकालिक (Long-term) आधार पर सुरक्षित करने पर चर्चा करेंगे।
इसके साथ ही, दोनों देशों के बीच व्यापार 65 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है, लेकिन यह रूस के पक्ष में बहुत अधिक झुका हुआ है (Trade Deficit)। भारत चाहता है कि रूस फार्मास्युटिकल्स, कृषि उत्पादों और इंजीनियरिंग सामानों के लिए अपना बाजार खोले ताकि इस घाटे को कम किया जा सके। ‘रुपये-रूबल’ (Rupee-Ruble) भुगतान तंत्र में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने पर भी दोनों नेता सीधी बात करेंगे।
पश्चिम के लिए कड़ा संदेश
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि भारत एक बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) में विश्वास करता है। भारत किसी एक गुट का हिस्सा नहीं है और वह मॉस्को तथा वाशिंगटन दोनों के साथ अपने संबंधों को स्वतंत्र रूप से संतुलित (Balance) करने की क्षमता रखता है। पुतिन के साथ होने वाली यह शिखर वार्ता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि यूरेशिया क्षेत्र में भारत के कूटनीतिक दबदबे को भी स्थापित करेगी।