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भारत की ‘डीप टेक’ में ऐतिहासिक छलांग: राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को मिली 6,000 करोड़ रुपये की मंजूरी, स्टार्टअप्स और शोध को मिलेगा महा-बूस्ट

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: भारत को विज्ञान और भविष्य की तकनीक (Future Technology) में विश्व गुरु बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘राष्ट्रीय क्वांटम मिशन’ (National Quantum Mission – NQM) के तहत अगले कुछ वर्षों के लिए 6,000 करोड़ रुपये के नए और विशाल बजटीय आवंटन को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। यह मिशन भारत को क्वांटम कंप्यूटिंग और ‘डीप टेक’ (Deep Tech) के क्षेत्र में दुनिया के टॉप 6 एलीट देशों (अमेरिका, चीन, फ्रांस आदि) की कतार में खड़ा कर देगा।

क्या है क्वांटम तकनीक और यह क्यों है जरूरी?

क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing) विज्ञान की वह अत्याधुनिक शाखा है जो सामान्य सुपरकंप्यूटरों से लाखों गुना अधिक तेजी से डेटा प्रोसेस कर सकती है। यह तकनीक उन जटिल समस्याओं को सेकंडों में सुलझा सकती है जिन्हें हल करने में आज के सबसे शक्तिशाली कंप्यूटरों को हजारों साल लग जाएंगे।
इस 6,000 करोड़ रुपये के फंड का उपयोग मुख्य रूप से चार बड़े क्षेत्रों में किया जाएगा:
1. सुरक्षित संचार (Quantum Communication): ऐसी हैक-प्रूफ (Hack-proof) संचार प्रणाली विकसित करना, जिसे कोई भी साइबर अपराधी या दुश्मन देश डिकोड न कर सके। यह रक्षा और बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक गेम चेंजर होगा।
2. क्वांटम सेंसिंग: स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) और सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए अति-संवेदनशील रडार और सेंसर बनाना।
3. नई दवाओं की खोज (Drug Discovery): जटिल बीमारियों के लिए जीन लेवल पर तेजी से दवाओं का विकास करना।

स्टार्टअप्स और रिसर्च इकोसिस्टम को बढ़ावा

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस मिशन के तहत देश भर के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों (जैसे IITs, IISc) में चार ‘थिमैटिक हब’ (T-Hubs) स्थापित किए जाएंगे। सरकार इस फंड का एक बड़ा हिस्सा सीधे उन भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स और युवा वैज्ञानिकों को अनुदान (Grants) के रूप में देगी, जो क्वांटम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पर काम कर रहे हैं।

आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान

अभी तक भारत कई क्रिटिकल तकनीकों के लिए पश्चिमी देशों पर निर्भर रहा है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के इस भारी वित्तीय समर्थन से ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को एक नई उड़ान मिलेगी। उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का जोरदार स्वागत करते हुए कहा है कि यह निवेश न केवल देश की सामरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा, बल्कि आने वाले दशकों में भारत को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला (Global Tech Supply Chain) का सिरमौर भी बना देगा।