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नीति आयोग ने ‘नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन 2.0’ का ब्लूप्रिंट जारी किया; ग्रामीण क्षेत्रों में टेली-मेडिसिन का दायरा बढ़ेगा

Vivek Ojha/  नई दिल्ली: भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक बड़ी डिजिटल क्रांति की शुरुआत करते हुए नीति आयोग ने ‘नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन’ (NDHM) के दूसरे चरण यानी 2.0 का विस्तृत ब्लूप्रिंट जारी कर दिया है। इस नए चरण का मुख्य उद्देश्य भारत के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना और शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की खाई को पाटना है। इस ब्लूप्रिंट के लागू होने से ग्रामीण भारत में ‘टेली-मेडिसिन’ का एक विशाल और सुलभ नेटवर्क तैयार होगा।

क्या है NDHM 2.0 का विजन?

नीति आयोग द्वारा जारी किए गए विजन डॉक्यूमेंट के अनुसार, NDHM 2.0 पूरी तरह से तकनीक संचालित स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बनाने पर केंद्रित है। इसके तहत देश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) को हाई-स्पीड इंटरनेट और टेली-मेडिसिन इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ा जाएगा। मरीज अब गांव में बैठकर ही एम्स (AIIMS) या राज्य के बड़े मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए परामर्श ले सकेंगे।

डिजिटल हेल्थ आईडी (ABHA) का विस्तार

इस मिशन के तहत हर नागरिक के डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को उनके आभा (ABHA – Ayushman Bharat Health Account) कार्ड से लिंक करने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। ग्रामीण मरीजों को अब पर्चियों और पुरानी एक्स-रे रिपोर्ट की फाइलें लेकर शहर के अस्पतालों में भटकने की जरूरत नहीं होगी। डॉक्टर मरीज का आभा नंबर डालते ही उसकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री कंप्यूटर स्क्रीन पर देख सकेंगे, जिससे इलाज में लगने वाला समय और खर्च दोनों बचेंगे।

ई-संजीवनी (eSanjeevani) ओपीडी को अपग्रेडेशन

सरकार के मौजूदा टेली-मेडिसिन प्लेटफॉर्म ‘ई-संजीवनी’ को NDHM 2.0 के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस किया जा रहा है। एआई की मदद से मरीजों के सामान्य लक्षणों की शुरुआती जांच हो सकेगी और उन्हें सही विशेषज्ञ के पास डिजिटली रेफर किया जाएगा। इसके अलावा, ई-फार्मेसी को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, ताकि डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई दवाइयां ग्रामीण मरीजों को उनके घर के नजदीकी केंद्रों पर आसानी से उपलब्ध हो सकें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नीति आयोग के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि यह ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ (Health for All) की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक है। अगर इसे जमीनी स्तर पर सही ढंग से लागू किया गया, तो यह भारत के स्वास्थ्य सूचकांकों (Health Indicators) में एक ऐतिहासिक सुधार लाएगा।