गृह मंत्रालय ने साइबर क्राइम से निपटने के लिए राज्यों की पुलिस के बीच रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग के लिए ‘साइबर-कवच’ पोर्टल लॉन्च किया

Abhishek Singh/ नई दिल्ली: डिजिटल धोखाधड़ी और तेजी से बढ़ते हाई-टेक साइबर अपराधों पर निर्णायक नकेल कसने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। देश भर की कानून-प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) को एक ही डिजिटल मंच पर एकीकृत करने के उद्देश्य से सरकार ने ‘साइबर-कवच’ (Cyber-Kavach) नामक अत्याधुनिक पोर्टल लॉन्च किया है। यह पोर्टल सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस के बीच रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग सुनिश्चित करेगा, जिससे साइबर अपराधियों को राज्यों की सीमाओं या ‘क्षेत्राधिकार’ (Jurisdiction) की उलझनों का फायदा उठाने का मौका नहीं मिलेगा।
क्षेत्राधिकार की बाधाएं होंगी खत्म
साइबर अपराध की कार्यप्रणाली पारंपरिक अपराधों से बिल्कुल अलग होती है। आज अपराधी जामताड़ा, मेवात या किसी दूरस्थ इलाके में बैठकर हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति के बैंक खाते में सेंध लगा देते हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दो राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय और जानकारी साझा करने में लगने वाला समय होता है। कई बार कागजी कार्रवाई में इतना समय लग जाता है कि अपराधी पैसा निकाल कर फरार हो जाते हैं। ‘साइबर-कवच’ इस देरी और लालफीताशाही को पूरी तरह से खत्म करने का काम करेगा।
रीयल-टाइम अलर्ट और एआई (AI) का इस्तेमाल
इस नए ‘साइबर-कवच’ पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘रीयल-टाइम अलर्ट सिस्टम’ है। उदाहरण के तौर पर, यदि महाराष्ट्र में किसी साइबर ठगी की एफआईआर (FIR) दर्ज होती है और उसमें किसी विशेष बैंक खाते, संदिग्ध फोन नंबर या आईपी (IP) एड्रेस का जिक्र होता है, तो वह डेटा सिर्फ कुछ सेकंड में उत्तर प्रदेश, दिल्ली या देश के किसी भी पुलिस थाने के सिस्टम पर फ्लैश हो जाएगा। पोर्टल को एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस किया गया है, जो अपराधियों के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का विश्लेषण करेगा और संभावित हमलों की पूर्व चेतावनी (Predictive Policing) भी जारी करेगा।
बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों से सीधा जुड़ाव
यह पोर्टल केवल पुलिस विभागों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), देश के प्रमुख बैंकों, फाइनेंशियल वॉलेट्स और टेलीकॉम ऑपरेटरों के सर्वर के साथ भी गहराई से इंटीग्रेट किया गया है। अब जैसे ही पुलिस इस पोर्टल पर किसी फर्जी सिम कार्ड या संदिग्ध खाते को फ्लैग करेगी, संबंधित बैंक या टेलीकॉम कंपनी बिना किसी देरी के उसे देश भर में ब्लॉक कर सकेगी। इससे ‘गोल्डन ऑवर’ (अपराध होने के तुरंत बाद का समय) में ही ठगी गई रकम को फ्रीज करने में बड़ी सफलता मिलेगी।
गृह मंत्रालय के आला अधिकारियों का कहना है कि ‘साइबर-कवच’ डिजिटल इंडिया के दौर में नागरिकों की गाढ़ी कमाई सुरक्षित रखने के लिए एक अभेद्य दीवार साबित होगा। यह पहल न केवल पुलिस के काम को स्मार्ट बनाएगी, बल्कि साइबर अपराधियों के भीतर कानून का खौफ भी पैदा करेगी।