राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विनिर्माण (Construction) साइट्स के लिए नए ग्रीन ऑडिट नियम लागू किए पल्लवी श्रीवास्तव

नई दिल्ली: सर्दियों का मौसम आने से पहले ही दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण (Air Pollution) के खतरे को टालने के लिए प्रशासन ने इस बार पहले ही कमर कस ली है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने एक संयुक्त निर्देश जारी करते हुए एनसीआर में चल रहे सभी छोटे-बड़े निर्माण (Construction) कार्यों के लिए कड़े ‘ग्रीन ऑडिट’ (Green Audit) नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। सरकार की कोशिश है कि सर्दियों में बनने वाले ‘गैस चैंबर’ की स्थिति को इस बार किसी भी कीमत पर रोका जाए।
क्या है ग्रीन ऑडिट नियम?
नए नियमों के अनुसार, अब दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में 500 वर्ग मीटर से बड़े किसी भी प्लॉट पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले बिल्डर्स को सरकारी पैनल द्वारा ‘ग्रीन ऑडिट’ कराना अनिवार्य होगा। इस ऑडिट रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि निर्माण स्थल से उड़ने वाली धूल (Dust Pollution) को रोकने के लिए क्या उपाय किए गए हैं। साइट्स के चारों ओर कम से कम 10 फीट ऊंची टिन शेड की दीवार खड़ी करना और खुले में रखी निर्माण सामग्री (रेत, सीमेंट) को ग्रीन कवर से ढकना अनिवार्य कर दिया गया है।
एंटी-स्मॉग गन और सेंसर लगाना जरूरी
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, जैसे हाईवे, फ्लाईओवर और कमर्शियल बिल्डिंग्स के निर्माण स्थलों पर सिर्फ पानी का छिड़काव काफी नहीं होगा। नई गाइडलाइन के तहत ऐसी साइट्स पर कम से कम दो ‘एंटी-स्मॉग गन’ (Anti-Smog Gun) लगातार चालू हालत में रखनी होंगी। इसके अलावा, साइट के बाहर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंसर लगाए जाएंगे, जिनका डेटा सीधे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर से जुड़ा होगा। अगर किसी साइट पर पीएम 10 (PM 10) या पीएम 2.5 का स्तर तय सीमा से ऊपर जाता है, तो सर्वर अपने आप रेड अलर्ट भेज देगा।
नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और सीलिंग
प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इन नियमों की अनदेखी करने वालों पर कोई रहम नहीं किया जाएगा। उल्लंघन पाए जाने पर पहली बार में 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर बिल्डर फिर भी नियमों का पालन नहीं करता है, तो बिना कोई नोटिस दिए निर्माण स्थल को सील (Seal) कर दिया जाएगा और पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) वसूली जाएगी।
विशेषज्ञों ने प्रशासन के इस ‘प्री-एम्प्टिव’ (Pre-emptive) कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि धूल और विनिर्माण कचरा दिल्ली के प्रदूषण में लगभग 25 से 30 प्रतिशत का योगदान देते हैं। अगर समय रहते इन पर सख्ती से लगाम लगाई जाए, तो इस बार सर्दियों में दिल्लीवासियों को जहरीली हवा से काफी हद तक राहत मिल सकती है।