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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 67 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा

इंडियन व्यू टीम/  नई दिल्ली: भारत के चिकित्सा शिक्षा (Medical Education) क्षेत्र में एक बड़े सुधार की रूपरेखा तैयार करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। देश भर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ प्रोफेसरों और अनुभवी फैकल्टी की भारी कमी को दूर करने के लिए मंत्रालय ने चिकित्सा शिक्षकों की सेवानिवृत्ति (Retirement) की उम्र 65 वर्ष से बढ़ाकर 67 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम विशेष रूप से देश के नव-निर्मित मेडिकल कॉलेजों को सुचारू रूप से चलाने में संजीवनी का काम करेगा।

फैकल्टी का संकट और एमबीबीएस (MBBS) सीटें

पिछले एक दशक में भारत सरकार ने टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में रिकॉर्ड संख्या में नए मेडिकल कॉलेज खोले हैं, जिससे एमबीबीएस और पीजी (PG) सीटों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। लेकिन इन कॉलेजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) के मानकों के अनुरूप योग्य और अनुभवी सीनियर रेजिडेंट्स, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसरों की नियुक्ति करना रही है। फैकल्टी की कमी के कारण कई नए कॉलेजों को एनएमसी (NMC) से मान्यता मिलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उम्र बढ़ाने से क्या होगा फायदा?

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकांश चिकित्सा शिक्षक मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्रिय होते हैं। उनके पास 30-40 वर्षों का गहन नैदानिक (Clinical) और शैक्षणिक अनुभव होता है। रिटायरमेंट की उम्र को 2 साल और बढ़ाकर 67 वर्ष करने से सरकार को नए प्रोफेसर तैयार करने के लिए एक ‘बफर टाइम’ (Buffer Time) मिल जाएगा। अनुभवी डॉक्टर्स के सिस्टम में बने रहने से न केवल छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

राज्यों से मांगा गया परामर्श

चूंकि स्वास्थ्य राज्य का विषय (State Subject) है, इसलिए केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव का मसौदा सभी राज्य सरकारों को भेजकर उनसे उनकी राय मांगी है। वर्तमान में कुछ राज्यों ने पहले ही अपने स्तर पर मेडिकल फैकल्टी की उम्र 65 वर्ष कर रखी है, जबकि कुछ राज्यों में यह अभी भी 62 या 60 वर्ष है। इस नए प्रस्ताव का उद्देश्य पूरे देश में चिकित्सा शिक्षकों के लिए एक समान और विस्तारित आयु सीमा लागू करना है।

इंडियन व्यू टीम के विश्लेषण के अनुसार, भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) और चिकित्सा जगत से जुड़े कई विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का सैद्धांतिक रूप से स्वागत किया है। हालांकि, युवा डॉक्टरों के एक वर्ग का मानना है कि वरिष्ठों की सेवा विस्तार से युवाओं के प्रमोशन (Promotion) के अवसर कुछ समय के लिए रुक सकते हैं। सरकार को इन दोनों पहलुओं के बीच संतुलन बनाकर ही अंतिम निर्णय लागू करना होगा।