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देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इसी शैक्षणिक सत्र से ‘क्रेडिट-बेस्ड मल्टीपल एंट्री और एग्जिट’ सिस्टम पूरी तरह अनिवार्य

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को लचीला (Flexible) और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रमुख प्रावधानों को सख्ती से लागू करते हुए यूजीसी ने देश के सभी 45 से अधिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इसी शैक्षणिक सत्र से ‘क्रेडिट-बेस्ड मल्टीपल एंट्री और एग्जिट’ (Multiple Entry and Exit System) प्रणाली को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। अब छात्र अपनी सुविधा और परिस्थितियों के अनुसार अपनी डिग्री की पढ़ाई को बीच में रोक भी सकेंगे और बाद में उसे वहीं से दोबारा शुरू भी कर सकेंगे।

क्या है यह नया सिस्टम?

पुरानी व्यवस्था में यदि कोई छात्र किसी तीन या चार साल के ग्रेजुएशन कोर्स (जैसे B.A., B.Sc. या B.Tech) में दाखिला लेता था और किन्हीं आर्थिक या पारिवारिक कारणों से उसे पहले या दूसरे साल में पढ़ाई छोड़नी पड़ती थी, तो उसे ‘ड्रॉपआउट’ (Dropout) मान लिया जाता था। उसकी सालों की मेहनत बेकार हो जाती थी।

लेकिन नए ‘मल्टीपल एंट्री और एग्जिट’ सिस्टम के तहत अब ऐसा नहीं होगा। अगर कोई छात्र ग्रेजुएशन का पहला साल पूरा करके पढ़ाई छोड़ता है, तो उसे ‘सर्टिफिकेट’ (Certificate) दिया जाएगा। अगर वह दो साल पूरे करके छोड़ता है, तो उसे ‘डिप्लोमा’ (Diploma) मिलेगा। तीन साल पूरे करने पर ‘बैचलर डिग्री’ और चार साल पूरे करने पर ‘बैचलर विद रिसर्च/ऑनर्स’ की डिग्री मिलेगी। छात्र जब चाहे अपनी पढ़ाई का ब्रेक ले सकता है और कुछ साल बाद वापस आकर अपने बचे हुए कोर्स को पूरा कर सकता है।

एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) का अहम रोल

इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स’ (ABC) पोर्टल तैयार किया है। यह छात्रों के बैंक अकाउंट की तरह ही काम करेगा। छात्र जो भी विषय पढ़ेगा, उसके ‘क्रेडिट पॉइंट्स’ (Credit Points) सीधे उसके एबीसी (ABC) खाते में डिजिटल रूप से जमा हो जाएंगे। अगर कोई छात्र अपनी यूनिवर्सिटी बदलना चाहता है, तो वह आसानी से अपने जमा किए हुए क्रेडिट्स को दूसरी यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर करा सकेगा।

यूजीसी के अध्यक्ष का कहना है कि यह नई व्यवस्था छात्रों को मानसिक दबाव से मुक्त करेगी। यह उन युवाओं के लिए वरदान साबित होगी जो पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी (Earn while you learn) करना चाहते हैं या स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। शिक्षाविदों ने भी इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि यह भारत की शिक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों (ग्लोबल स्टैंडर्ड्स) के समकक्ष खड़ा करेगा।