पीएम मोदी ने युवाओं के धैर्य और परिश्रम की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर ‘प्राप्यापदं न व्यथते…’ संस्कृत सुभाषितम साझा किया

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के युवाओं के अदम्य साहस, धैर्य और उनके द्वारा विज्ञान से लेकर खेल जगत तक में हासिल की जा रही ऐतिहासिक सफलताओं की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर एक बेहद प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक साझा किया है। पीएम मोदी का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत के युवा वैज्ञानिक, स्टार्टअप फाउंडर्स और छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार देश का गौरव बढ़ा रहे हैं, चाहे वह ‘स्काईरूट’ की अंतरिक्ष में सफलता हो या साइंस ओलंपियाड्स में पदकों की झड़ी।
क्या है श्लोक का अर्थ?
प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स (X – पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर लिखा,
“प्राप्यापदं न व्यथते कदाचिदुद्योगमन्विच्छति चाप्रमत्तः।
दुःखं च काले सहते…”
इस प्राचीन संस्कृत सुभाषितम का अर्थ समझाते हुए पीएम ने लिखा कि, “जो व्यक्ति विपत्ति या संकट आने पर भी कभी विचलित नहीं होता, जो हमेशा धैर्य और सावधानी के साथ निरंतर उद्योग (परिश्रम) में लगा रहता है, और जो कठिन समय में दुखों को भी साहस के साथ सह लेता है— वही अंततः सफलता के शिखर पर पहुंचता है।”
युवाओं को बताया भारत की सबसे बड़ी ताकत
श्लोक के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने एक व्यक्तिगत संदेश भी लिखा, जिसमें उन्होंने कहा: “आज हमारे युवा साथी धैर्य, आत्मविश्वास और अथक परिश्रम से ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कर रहे हैं। यही अदम्य भावना विकसित हो रहे भारत (Developed India) की सबसे बड़ी ताकत है।”
सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने भाषणों और संदेशों में भारत की प्राचीन संस्कृति और ज्ञान (Traditional Knowledge) का उल्लेख करते रहते हैं। युवाओं को आधुनिक विज्ञान और तकनीक में उत्कृष्टता हासिल करने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इंडियन व्यू टीम के अनुसार, यह श्लोक उन लाखों छात्रों और युवाओं के लिए एक बड़ा ‘मोटिवेशनल मंत्र’ बन गया है जो प्रतियोगी परीक्षाओं, स्टार्टअप्स या खेल के मैदान में अपनी सफलताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पीएम मोदी की यह पोस्ट दिखाती है कि सरकार देश के ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (Demographic Dividend) यानी युवा आबादी की क्षमता को पहचानती है और उन्हें विश्व पटल पर हर चुनौती का सामना करने के लिए मानसिक और वैचारिक रूप से भी मजबूत कर रही है।