Trending

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का ऐलान- सरकार शिक्षा व्यवस्था पर जवाबदेही ले, तो मैं आज ही खत्म कर दूंगा अनशन

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का पिछले तीन हफ्तों से चला आ रहा आमरण अनशन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। नीट परीक्षा विवाद के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थन में 28 जून 2026 से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को जबरन जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था। लेकिन अस्पताल के बिस्तर से भी उनके हौसले पस्त नहीं हुए हैं।

अस्पताल से सरकार को सीधा अल्टीमेटम

सफदरजंग अस्पताल से जारी अपने एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने सरकार को स्पष्ट चुनौती दी है। उन्होंने कहा, “मैं बाहर से कमजोर जरूर दिख रहा हूं, लेकिन अंदर से बहुत मजबूत हूं। अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार की ठोस रूपरेखा पेश करती है और मौजूदा पेपर लीक संकट पर पूर्ण जवाबदेही (Accountability) तय करती है, तो मैं आज ही अपना अनशन तोड़ दूंगा।” उन्होंने 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च को भारत का ‘दूसरा स्वतंत्रता संग्राम’ करार दिया।

हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उनके पति को अवैध रूप से अस्पताल में नजरबंद किया गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था, इसलिए सरकार का उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय मनमाना (Arbitrary) नहीं था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वांगचुक ने इलेक्ट्रोलाइट्स लेने की सहमति दी थी, इसलिए उनके शारीरिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है।

वांगचुक के इस अनशन ने देश भर में शिक्षा सुधार की मांग को एक नई ऊर्जा दी है। वांगचुक का साफ कहना है कि उनका यह संघर्ष केवल मेडिकल छात्रों के लिए नहीं है, बल्कि देश के उस हर युवा के लिए है जो एक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का सपना देखता है।