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दिल्ली सरकार का शिक्षा क्षेत्र में बड़ा फैसला: प्राइवेट स्कूल खोलने के नियम किए आसान, अब अनिवार्य ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ सिस्टम होगा लागू

इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के शिक्षा मॉडल में एक और अहम ढांचागत सुधार करते हुए दिल्ली सरकार ने प्राइवेट (निजी) स्कूल खोलने और उनके संचालन की प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) की तर्ज पर शिक्षा निदेशालय (DoE) ने लालफीताशाही और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए नया ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ (स्व-प्रमाणन) सिस्टम लागू करने का आधिकारिक ऐलान किया है। इस फैसले से उन शिक्षाविदों और संस्थाओं को भारी राहत मिलेगी जो मान्यता (Recognition) के लिए सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते थे।

क्या है ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ सिस्टम?

अब तक दिल्ली में कोई भी नया स्कूल खोलने या मौजूदा स्कूल को अपग्रेड करने के लिए फायर, जल बोर्ड, एमसीडी, डीीडीए और शिक्षा विभाग से दर्जनों अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने पड़ते थे, जिसमें 2 से 3 साल तक का समय लग जाता था। नए नियमों के तहत, मैनेजमेंट को अब एक केंद्रीकृत पोर्टल पर हलफनामे (Affidavit) के साथ सिर्फ अपना ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ देना होगा कि उनका भवन सभी सुरक्षा और शैक्षणिक मानकों को पूरा करता है।

90 दिन की समय-सीमा तय

इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आवेदन करने के बाद शिक्षा विभाग को 90 दिनों के भीतर मान्यता पर फैसला लेना होगा। यदि इस अवधि के भीतर विभाग कोई आपत्ति दर्ज नहीं करता है, तो स्कूल को स्वतः (Deemed) मान्यता प्राप्त मान लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा के क्षेत्र में नए निवेश और नवाचार (Innovation) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे अंततः छात्रों को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा मिलेगा।

नियम तोड़ने पर होगी सख्त सजा

हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों में ढील का मतलब मनमानी करना बिल्कुल नहीं है। यदि निरीक्षण (Inspection) के दौरान यह पाया जाता है कि किसी स्कूल प्रबंधन ने ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ में झूठी जानकारी दी है या सुरक्षा मानकों (जैसे फायर सेफ्टी) से खिलवाड़ किया है, तो उस पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा और स्कूल का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मुकदमा भी दर्ज होगा।

इंडियन व्यू टीम के अनुसार, प्राइवेट स्कूल संघों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और इसे ‘इंस्पेक्टर राज’ के अंत की शुरुआत बताया है। यह नीति दिल्ली को एक एजुकेशन हब बनाने की दिशा में एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हो सकती है।