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रक्षा मंत्री ने किया सर्व-महिला विश्व परिक्रमा दल का स्वागत, बोले- नारी शक्ति का अद्भुत उदाहरण

नई दिल्ली ( अभिषेक सिंह) : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहली बार आयोजित त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ की सफल वापसी पर दल का औपचारिक स्वागत किया। भारतीय सेना के नौकायन पोत (आईएएसवी) ‘त्रिवेणी’ पर सवार तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों ने 314 दिनों में चार महासागरों में लगभग 25,500 समुद्री मील की यात्रा पूरी कर मुंबई लौटकर इतिहास रच दिया।

‘समुद्र प्रदक्षिणा’ नए भारत की पहचान : राजनाथ सिंह

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित स्वागत समारोह में रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ केवल एक समुद्री अभियान नहीं, बल्कि नए भारत के दृढ़ संकल्प, नारी शक्ति और त्रि-सेवा संयुक्तता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने साबित किया है कि भारत की महिलाएं अब केवल अवसरों का इंतजार नहीं करतीं, बल्कि नए अवसरों का सृजन करते हुए नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

314 दिनों में पूरे किए विश्व परिक्रमा के सभी मानक

11 सितंबर 2025 को मुंबई से शुरू हुए इस अभियान ने विश्व परिक्रमा के सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया। दल ने सभी देशांतर रेखाओं को पार किया, भूमध्य रेखा को दो बार पार किया, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पार किया और केप लीउविन, केप हॉर्न तथा केप ऑफ गुड होप जैसे तीन प्रमुख अंतरीपों का चक्कर लगाया।

केप हॉर्नर्स समुदाय की मिली सदस्यता

दल ने विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल ड्रेक जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया और केप हॉर्न का चक्कर लगाया। इस उपलब्धि के साथ दल को प्रतिष्ठित ‘केप हॉर्नर्स’ समुदाय की सदस्यता भी प्राप्त हुई, जो केवल उन नाविकों को दी जाती है जो इस कठिन समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार करते हैं।

त्रि-सेवा संयुक्तता का अनूठा उदाहरण

इस अभियान में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना की महिला अधिकारियों ने एक टीम के रूप में भाग लिया। दस महीने से अधिक समय तक साथ रहकर प्रशिक्षण लेने और नौकायन करने वाले इस दल ने संयुक्त योजना, साझा नेतृत्व और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अभियान दर्शाता है कि संयुक्तता केवल एक अवधारणा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति को कई गुना बढ़ाने वाला प्रभावी माध्यम है।

भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का बना दूत

विश्व के विभिन्न बंदरगाहों पर ठहराव के दौरान आईएएसवी ‘त्रिवेणी’ ने भारत की सांस्कृतिक विरासत, समुद्री परंपराओं और सैन्य पेशेवर क्षमता का परिचय दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह पोत केवल नौकायन अभियान का हिस्सा नहीं था, बल्कि भारत का ‘तैरता हुआ राजदूत’ बनकर मित्र देशों के साथ सद्भाव और सहयोग को भी मजबूत करता रहा।

आत्मनिर्भर भारत की मिसाल बना आईएएसवी ‘त्रिवेणी’

रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वदेश में निर्मित 50 फुट लंबा आईएएसवी ‘त्रिवेणी’ भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, स्वदेशी क्षमता और सामरिक आत्मविश्वास का प्रमाण है। उन्होंने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पोत देश की तकनीकी दक्षता और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित सहित तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी और ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, अर्जेंटीना तथा दक्षिण अफ्रीका के रक्षा प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और दल के परिजनों ने भी महिला अधिकारियों का भव्य स्वागत किया।