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राष्ट्रीय प्रसारण दिवस: आज ही के दिन वर्ष 1927 में मुंबई से शुरू हुआ था पहला रेडियो प्रसारण

नई दिल्ली ( इंडियन व्यू टीम) : आज राष्ट्रीय प्रसारण दिवस है। इसी दिन वर्ष 1927 में मुंबई से देश का पहला रेडियो प्रसारण शुरू हुआ था। बाद में वर्ष 1936 में ऑल इंडिया रेडियो की स्थापना हुई और 1956 में इसका नाम आकाशवाणी रखा गया।

इसके बाद 1957 में लोकप्रिय फिल्म संगीत के साथ विविध भारती सेवा की शुरुआत हुई। रेडियो ने आज़ादी की लड़ाई से लेकर देश के विकास तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जन-जागरूकता के क्षेत्र में आकाशवाणी ने लोगों तक सही और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाई है। आज भी ध्येय वाक्य “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” के साथ सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के क्षेत्र में आकाशवाणी की सेवाएं जारी है।

भारत में नेशनल ब्रॉडकास्टिंग डे 1927 में अपनी शुरुआत के बाद से देश के ब्रॉडकास्टिंग माहौल के विकास की याद में मनाया जाता है। यह दिन भारत के विकास, एजुकेशनल आउटरीच और सांस्कृतिक संरक्षण में ब्रॉडकास्टिंग की अहम भूमिका को दिखाता है।

भारत में प्रसारण का इतिहास और महत्व :

भारत की ब्रॉडकास्टिंग यात्रा जून 1923 में बॉम्बे के रेडियो क्लब के पहले ट्रांसमिशन के साथ शुरू हुई। इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी (IBC) की स्थापना 23 जुलाई, 1927 को हुई, जिससे देश में संगठित रेडियो ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत हुई। इस तारीख को अब नेशनल ब्रॉडकास्टिंग डे के रूप में मनाया जाता है।

ऑल इंडिया रेडियो 1936 में भारतीय राज्य प्रसारण सेवा से विकसित होकर उभरा। आज़ादी के बाद, AIR का तेज़ी से विस्तार हुआ और 1956 में इसे “आकाशवाणी ” नाम दिया गया। आज, AIR 591 स्टेशन संचालित करता है, जो भारत की 98% आबादी तक पहुँचता है और 23 भाषाओं और 146 बोलियों में प्रसारण करता है।

भारत के विकास में ब्रॉडकास्टिंग का अहम रोल रहा है। आज़ादी की लड़ाई के दौरान, रेडियो जानकारी फैलाने और एकता को बढ़ावा देने का एक पावरफुल ज़रिया था। आज़ादी के बाद, यह खासकर ग्रामीण इलाकों में लिटरेसी, हेल्थ अवेयरनेस और खेती-बाड़ी की जानकारी को बढ़ावा देने में मददगार रहा है।

AIR का एक्सटर्नल सर्विसेज़ डिवीज़न 100 से ज़्यादा देशों में ब्रॉडकास्ट करता है, जो दुनिया भर में भारत की आवाज़ पहुंचाता है और डायस्पोरा से जुड़ता है। FM चैनल्स की शुरुआत और डिजिटल रेडियो मोंडियाल (DRM) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके डिजिटल ट्रांसमिशन में बदलाव, मॉडर्नाइज़ेशन के लिए AIR के कमिटमेंट को दिखाता है।

नेशनल ब्रॉडकास्टिंग डे सिर्फ़ टेक्नोलॉजी में तरक्की का ही नहीं, बल्कि रेडियो की हमेशा रहने वाली ताकत का भी जश्न मनाता है, जो अलग-अलग तरह के लोगों को जानकारी देने, सिखाने, मनोरंजन करने और एक साथ लाने में मदद करती है। जैसे-जैसे भारत डिजिटल युग में आगे बढ़ रहा है, पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग के सिद्धांत बहुत ज़रूरी बने हुए हैं, जिससे यह पक्का होता है कि रेडियो भारतीय समाज में एक ज़रूरी माध्यम बना रहे।