छत्तीसगढ़: अग्निवीर सैनिकों को पुलिस विभाग, वन और जेल विभाग में 10% का आरक्षण

रायपुर ( इंडियन व्यू टीम) : छत्तीसगढ़ में अब अग्निवीर सैनिकों को पुलिस विभाग में आरक्षक, वन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में प्रहरी की सीधी भर्ती में 10% आरक्षण मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
इसका लाभ उन अग्निवीरों को मिलेगा, जो चार वर्ष की सेवा पूरी कर वैध सेवा प्रमाण-पत्र के साथ सेवामुक्त हुए हैं। राज्य सरकार ने कहा है कि इससे अग्निवीरों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और उनके अनुशासन तथा अनुभव का लाभ राज्य की सेवाओं को मिलेगा।
अग्निवीर, भारत सरकार द्वारा ‘अग्निपथ योजना’ के तहत भारतीय सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) में भर्ती होने वाले सैनिकों को दिया गया एक नया नाम या पद है। यह भर्ती 4 साल के अनुबंध के आधार पर होती है, जिसमें 25% सैनिकों को बाद में स्थायी कर लिया जाता है।
अग्निपथ योजना और अग्निवीरों के बारे में मुख्य जानकारी
भर्ती और आयु: इस योजना के तहत 17.5 वर्ष से 21 वर्ष तक के युवाओं को सेना में भर्ती किया जाता है (कुछ विशेष परिस्थितियों में ऊपरी आयु सीमा में छूट दी गई है)।
कार्यकाल: अग्निवीरों का कुल सेवा कार्यकाल 4 साल का होता है।
वेतन और भत्ते: पहले साल अग्निवीर को मासिक वेतन ₹30,000 मिलता है, जो चौथे साल तक बढ़कर लगभग ₹40,000 हो जाता है। इसमें से 30% राशि ‘सेवा निधि’ फंड में जमा होती है।
सेवा निधि पैकेज: 4 साल पूरे होने पर अग्निवीर को लगभग ₹11.71 लाख का पूरा पैकेज (ब्याज सहित) मिलता है, जो पूरी तरह से टैक्स-फ्री होता है।
स्थायीकरण (परमानेंट): 4 साल की सेवा पूरी करने के बाद, प्रदर्शन और संगठन की आवश्यकता के आधार पर 25% अग्निवीरों को नियमित कैडर में स्थायी (Permanent) कर लिया जाता है।
अन्य लाभ: सेवा के दौरान ₹48 लाख का जीवन बीमा कवर भी प्रदान किया जाता है। सेवा छोड़ने के बाद युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के लिए प्राथमिकता और प्रमाणपत्र दिए जाते हैं।