जम्मू-कश्मीर में लगातार भारी बारिश और खराब मौसम के चलते प्रशासन ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश में स्कूलों की छुट्टियां 26 जुलाई तक बढ़ाईं

विवेक ओझा/ श्रीनगर / जम्मू: पूरे उत्तर भारत के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में भी मॉनसून 2026 की मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। पिछले 72 घंटों से केंद्र शासित प्रदेश के कई जिलों में रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश, भूस्खलन (Landslide) और फ्लैश फ्लड (Flash Flood) के खतरे को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक बड़ा एहतियाती कदम उठाया है। प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कश्मीर और जम्मू दोनों संभागों के सभी सरकारी और निजी स्कूलों की गर्मियों की छुट्टियां 26 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
मौसम विभाग की चेतावनी और रेड अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के श्रीनगर केंद्र ने अगले कुछ दिनों के लिए केंद्र शासित प्रदेश के कई ऊंचाई वाले और पहाड़ी इलाकों में भारी से अति भारी बारिश का ‘रेड और ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के कारण नदियों और नालों (जैसे चिनाब और झेलम) का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
छात्रों की सुरक्षा पर प्रशासन का जोर
शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन और सड़कों के कटने के कारण स्कूली बच्चों को यात्रा करने में भारी जोखिम का सामना करना पड़ रहा था। रामबन, डोडा, किश्तवाड़ और पुंछ जैसे जिलों में कई संपर्क मार्ग टूट गए हैं। इसलिए, किसी भी संभावित दुर्घटना को टालने के लिए स्कूलों को 26 जुलाई तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन ऑनलाइन कक्षाएं (Online Classes) आयोजित करने के लिए स्वतंत्र हैं।
तीर्थयात्राएं और राजमार्ग प्रभावित
खराब मौसम का सीधा असर प्रमुख तीर्थयात्राओं पर भी पड़ा है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर पंथियाल और रामसू के पास बार-बार पत्थर गिरने के कारण राजमार्ग को यातायात के लिए कई बार बंद करना पड़ा है। इसके चलते पवित्र अमरनाथ यात्रा को भी एहतियात के तौर पर बालटाल और पहलगाम दोनों बेस कैंपों पर रोक दिया गया है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे जल निकायों (Water Bodies) और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास न जाएं।