कृषि क्षेत्र में नई पहल: भारत सरकार ने कपास (Cotton) को भारत का ‘सफेद सोना’ बताते हुए 6 करोड़ किसानों की आजीविका के लिए नई फैक्टशीट जारी की

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: भारत के कृषि और कपड़ा क्षेत्र (Textile Sector) को वैश्विक पटल पर और अधिक मजबूत करने के लिए, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने आज भारतीय कपास पर एक विस्तृत और अहम ‘फैक्टशीट’ (Factsheet) जारी की है। इस सरकारी दस्तावेज़ में कपास को भारत का ‘सफेद सोना’ (White Gold) करार दिया गया है और स्पष्ट किया गया है कि देश के लगभग 6 करोड़ किसान और उनके परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कपास की खेती और उससे जुड़े उद्योगों पर निर्भर हैं।
कस्तूरी कॉटन (Kasturi Cotton) ब्रांडिंग पर जोर
जारी की गई फैक्टशीट में भारत सरकार की ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ पहल का विशेष उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक प्रीमियम ब्रांड (Premium Brand) के रूप में स्थापित करना है, ताकि वह विश्व स्तर पर मिस्र (Egyptian) और अमेरिकी (Pima) कपास को कड़ी टक्कर दे सके। इसके लिए ब्लॉकचेन (Blockchain) तकनीक का उपयोग करके कपास की ट्रेसिबिलिटी (Traceability) सुनिश्चित की जा रही है, ताकि खरीदार को यह पता चल सके कि कपास भारत के किस खेत से आया है।
किसानों के लिए आय बढ़ाने की नई नीतियां
फैक्टशीट में कपास उगाने वाले प्रमुख राज्यों—जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और मध्य प्रदेश—के किसानों की आय दोगुनी करने की रूपरेखा भी दी गई है। इसके तहत किसानों को उन्नत किस्म के बीज, ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) के उपकरण और पिंक वॉल्वर्म (Pink Bollworm) जैसे कीटों से निपटने के लिए नई वैज्ञानिक तकनीकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। सरकार ने एमएसपी (MSP) खरीद केंद्रों की संख्या भी बढ़ा दी है ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सके।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कपास केवल एक फसल नहीं है, बल्कि यह भारत के सबसे बड़े रोजगार प्रदाता उद्योग (कपड़ा उद्योग) की रीढ़ है। ‘सफेद सोना’ के उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार से न केवल किसानों की आजीविका सुरक्षित होगी, बल्कि भारत के निर्यात राजस्व (Export Revenue) में भी जबरदस्त उछाल आएगा।