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दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन, जस्टिस अनु ग्रोवर बलिगा स्पेशल जज नियुक्त

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने इस दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। हाई कोर्ट प्रशासन ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम 2024’ और पेपर लीक से जुड़े अन्य आपराधिक मामलों की दिन-प्रतिदिन (Day-to-Day) सुनवाई के लिए एक विशेष ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ (Fast Track Court) का गठन कर दिया है। यह नई अदालत दिल्ली के ‘राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स’ (Rouse Avenue Court Complex) से संचालित होगी।

जस्टिस अनु ग्रोवर बलिगा को कमान

उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, तेज-तर्रार न्यायिक अधिकारी जस्टिस अनु ग्रोवर बलिगा को इस विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का स्पेशल जज (PC Act) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह तीस हजारी कोर्ट में मीडिएशन सेंटर की जज-इन-चार्ज के रूप में कार्यरत थीं। उन्हें तुरंत प्रभाव से अपनी नई जिम्मेदारी संभालने का आदेश दिया गया है।

पुराने सभी मामले भी होंगे ट्रांसफर

हाई कोर्ट के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली की विभिन्न अदालतों में लंबित पेपर लीक, डमी कैंडिडेट बिठाने और परीक्षा धांधली से जुड़े सभी पुराने मामलों को भी तत्काल प्रभाव से इसी नई फास्ट ट्रैक अदालत में स्थानांतरित (Transfer) किया जाएगा। इससे सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा की जा रही जांच और मुकदमों में भारी तेजी आएगी।

सरकार और न्यायपालिका का सख्त रुख

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका दोनों ही देश के परीक्षा तंत्र को दूषित करने वाले शिक्षा माफियाओं के खिलाफ पूरी तरह से कमर कस चुके हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन से उन अपराधियों में खौफ पैदा होगा जो कानूनी खामियों और अदालती देरी का फायदा उठाकर सालों तक बचते आए हैं। अब ऐसे मामलों में महीनों के भीतर ही अंतिम फैसला आने की उम्मीद है।