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शिक्षा मंत्रालय में बदलाव: प्रह्लाद जोशी को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया, नीट (NEET) विवाद को सुलझाने की होगी अहम जिम्मेदारी

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट में एक त्वरित और महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर जोशी के नए पोर्टफोलियो को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। प्रह्लाद जोशी के सामने वर्तमान में उबल रहे शिक्षा संकट और छात्रों के भरोसे को फिर से जीतने की एक बेहद कठिन चुनौती होगी।

क्यों चुना गया प्रह्लाद जोशी को?

प्रह्लाद जोशी को एक बेहद सुलझे हुए, शांत स्वभाव वाले और संकटमोचक (Troubleshooter) राजनेता के रूप में जाना जाता है। उनके पास संसदीय कार्य मंत्री के रूप में सरकार और विपक्ष के बीच मध्यस्थता करने का लंबा अनुभव है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने जोशी को यह जिम्मेदारी इसलिए सौंपी है ताकि वे शिक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और नाराज छात्रों तथा विपक्षी दलों के बीच संवाद का एक नया सेतु (Bridge) बना सकें।

सामने हैं पहाड़ जैसी चुनौतियां

कार्यभार संभालते ही नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नीट-यूजी (NEET-UG) विवाद को पूरी तरह से सुलझाना और एनटीए (NTA) के कामकाज में पारदर्शी सुधार लागू करना है। शिक्षाविदों का मानना है कि उन्हें जल्द ही देश के शीर्ष शिक्षाविदों, राज्य सरकारों और छात्र प्रतिनिधियों के साथ एक सर्वदलीय और सर्व-हितधारक बैठक बुलानी होगी। पदभार ग्रहण करने के बाद जोशी ने कहा, “छात्रों के भविष्य की पवित्रता सुनिश्चित करना सरकार का प्रथम धर्म है, और मैं इस व्यवस्था में 100 प्रतिशत पारदर्शिता लाने के लिए प्रतिबद्ध हूं।”