जनस्वास्थ्य के लिए नई चुनौती: भारत में डेंगू का प्रकोप हुआ और जटिल, एक साथ सक्रिय हैं कई खतरनाक वायरस स्ट्रेन

विवेक ओझा
नई दिल्ली
मानसून के मौसम के साथ ही देश भर में पैर पसारने वाली बीमारी ‘डेंगू’ (Dengue) को लेकर एक बेहद चिंताजनक वैज्ञानिक अध्ययन सामने आया है। भारत के शीर्ष चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों द्वारा किए गए ताज़ा अध्ययन के अनुसार, भारत में डेंगू का संकट अब केवल मामलों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अत्यधिक जटिल (Complex) रूप धारण कर चुका है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि देश के विभिन्न राज्यों में डेंगू वायरस के कई अलग-अलग स्ट्रेन (Multiple Virus Strains) एक साथ सक्रिय हैं और एक ही समय में लोगों को संक्रमित कर रहे हैं।
अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जब एक ही व्यक्ति में या एक ही क्षेत्र में डेंगू के दो अलग-अलग सेरोटाइप (जैसे DENV-2 और DENV-4) एक साथ प्रसारित होते हैं, तो ‘एंटीबॉडी-डिपेंडेंट एन्हांसमेंट’ (ADE) के कारण गंभीर डेंगू (जैसे डेंगू हेमोरेजिक बुखार और डेंगू शॉक सिंड्रोम) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके कारण मरीजों में प्लेटलेट्स का तेज़ी से गिरना, आंतरिक रक्तस्राव और अंगों का विफल होना जैसी गंभीर समस्याएं देखी जा रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारों को सलाह दी है कि केवल पारंपरिक ‘फॉगिंग’ (Fogging) और पानी जमा न होने देने के उपायों से आगे बढ़कर अब ‘जीनोम सीक्वेंसिंग’ (Genome Sequencing) पर ध्यान देना होगा, ताकि यह पहचाना जा सके कि किस इलाके में कौन सा स्ट्रेन अधिक घातक है। इसके साथ ही, अस्पतालों में प्लेटलेट्स की उपलब्धता बनाए रखने और डॉक्टरों को नए स्ट्रेन के लक्षणों के प्रति सचेत करने के लिए गाइडलाइंस जारी की गई हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वे बुखार के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।