पीएम इंटर्नशिप योजना 2026: अवसरों में बढ़ोतरी के बाद भी युवाओं की ‘कम स्वीकृति दर’ बनी सरकार के लिए चुनौती

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली: देश के युवाओं को कॉरपोरेट जगत का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने और उन्हें रोजगार योग्य बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना 2026’ को लेकर एक नया प्रशासनिक आंकड़ा सामने आया है। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में राज्यवार इंटर्नशिप के अवसरों (Slots) में भारी बढ़ोतरी होने के बावजूद, चयनित उम्मीदवारों द्वारा ऑफर स्वीकार करने की दर (Acceptance Rate) काफी कम दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की टॉप 500 कंपनियों में हजारों युवाओं को इंटर्नशिप के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था, लेकिन इनमें से लगभग 35 से 40 प्रतिशत युवाओं ने जॉइनिंग ऑफर को स्वीकार नहीं किया। इसके पीछे के कारणों का विश्लेषण करते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इंटर्नशिप के स्थान का गृहनगर से दूर होना, मासिक स्टाइपेंड के मुकाबले दूसरे शहरों में रहने का खर्च अधिक होना, और उच्च शिक्षा (Post-Graduation या Competitive Exams) की तैयारी में बाधा आना प्रमुख वजहें हैं।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार इस ‘लो एक्सेप्टेंस रेट’ की समस्या को गंभीरता से ले रही है। इसके समाधान के लिए अब कंपनियों को निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे यथासंभव युवाओं को उनके गृह जिले या निकटतम औद्योगिक क्लस्टर में ही इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करें। इसके साथ ही स्टाइपेंड संरचना में सुधार करने और दूर-दराज के छात्रों के लिए लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि योजना का वास्तविक लाभ अंतिम छोर पर खड़े युवा तक पहुंच सके।