कावेरी जल विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट: तमिलनाडु ने 3,500 क्यूसेक पानी के लिए खटखटाया शीर्ष अदालत का दरवाजा

विवेक ओझा/ नई दिल्ली / चेन्नई: कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद एक बार फिर गहरा गया है। तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके (DMK) सरकार ने कर्नाटक से पानी छुड़वाने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने याचिका दायर कर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।
तमिलनाडु ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और नियमन समिति (CWRC) के 28 और 30 जुलाई के निर्देशों का पालन करने का आदेश दे। इन निर्देशों के तहत कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी बिलिगुंडलू (Biligundlu) पॉइंट पर छोड़ना है। राज्य सरकार का कहना है कि कर्नाटक के चार प्रमुख जलाशयों (KRS, काबिनी आदि) में हालिया भारी बारिश के कारण 77.537 टीएमसी (TMC) का कुल जल भंडारण हो चुका है, लेकिन फिर भी वह पानी छोड़ने से कतरा रहा है।
याचिका में 1 जून से 12 अगस्त के बीच हुए लगभग 26.95 टीएमसी के कुल बैकलॉग (Shortfall) को ‘प्रो-राटा’ (Pro-rata) आधार पर तुरंत जारी करने की भी मांग की गई है। तमिलनाडु का तर्क है कि अगर तुरंत पानी नहीं मिला तो डेल्टा क्षेत्र के किसानों की फसलें बुरी तरह प्रभावित होंगी। इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कन्नड़ संगठनों से 13 अगस्त को प्रस्तावित राज्यव्यापी बंद को वापस लेने की अपील की है।