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उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को घटाने की बड़ी पहल

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने नए जजों की नियुक्ति के लिए विधि मंत्रालय को भेजी सिफारिश

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: देश भर की उच्च अदालतों (High Courts) में जजों की कमी से जूझ रहे न्याय तंत्र को सुदृढ़ करने और करोड़ों लंबित मामलों (Pendency of Cases) को तेजी से निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम पीठ ने विभिन्न राज्यों के उच्च न्यायालयों में स्थायी और अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए योग्य न्यायिक अधिकारियों और वरिष्ठ वकीलों के नामों की एक नई सिफारिशी सूची केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय को भेजी है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस नई सिफारिश सूची में इलाहाबाद, बॉम्बे, मद्रास, पंजाब एवं हरियाणा और दिल्ली हाई कोर्ट सहित देश की प्रमुख उच्च अदालतों के लिए तीन दर्जन से अधिक नामों का प्रस्ताव किया गया है। कॉलेजियम ने स्पष्ट किया है कि सिफारिश तैयार करते समय न्यायिक क्षमता, निष्पक्षता के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, वर्तमान में विभिन्न उच्च न्यायालयों में स्वीकृत पदों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण अदालतों पर मुकदमों का भारी बोझ बना हुआ है। कॉलेजियम ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इन सिफारिशों पर शीघ्रता से विचार कर प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जाए और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र जारी किए जाएं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नए न्यायाधीशों की पदोन्नति और नियुक्ति से निचली और उच्च अदालतों में सालों से अटके दीवानी व आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे में भारी मदद मिलेगी।