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होर्मुज जलडमरूमध्य पर ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद

ओमान की मध्यस्थता में मस्कट वार्ता अंतिम चरण में

राघवेन्द्र प्रताप सिंह/ मस्कट / तेहरान: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव को कम करने और वैश्विक समुद्री व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए ओमान की मध्यस्थता रंग लाती दिख रही है। मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल वार्ता अब अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक नए समझौते की रूपरेखा पर लगभग सहमत हो गए हैं।

ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के विशेष दूतों द्वारा तैयार किए गए इस मसौदे (Draft) के अनुसार, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त करने वाले अपने नौसैनिक बेड़े और तेज हमलावर नौकाओं को पीछे हटाने पर सैद्धांतिक रूप से राजी हो गया है। इसके बदले में अमेरिका और उसके सहयोगी देश लाल सागर और फारस की खाड़ी में अपनी सैन्य मौजूदगी को कम करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों (Commercial Shipping) और तेल टैंकरों को अबाध रूप से गुजरने की सुरक्षा गारंटी दी जाएगी।

वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, इसलिए इस समझौते को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी इन वार्ताओं को “सकारात्मक और परिणामोन्मुखी” बताया है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो यह न केवल तेल की कीमतों को स्थिर करेगा बल्कि अमेरिका-ईरान के बीच भविष्य की किसी बड़ी परमाणु वार्ता के लिए विश्वास निर्माण (Confidence Building) का काम भी करेगा।