जयपुर में 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक हुई संपन्न
नई दिल्ली ( अभिषेक सिंह ) : भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत जयपुर में 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के उद्योग मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एमएसएमई, फोटोवोल्टिक उद्योग, स्टार्टअप्स और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। बैठक के दौरान 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक के संयुक्त घोषणापत्र को स्वीकार किया गया और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाया गया।
समूह (सीजीईटीआई) की तीसरी बैठक हुई। व्यापार मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल करेंगे। इसमें केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भी भाग लेंगे।
बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और एमएसएमई पर होगी चर्चा
व्यापार मंत्रियों की बैठक में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी। सीजीईटीआई के तहत हुई चर्चाओं में बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने, मजबूत एवं विविध ग्लोबल वैल्यू चेन को बढ़ावा देने और सीमा पार डिजिटल सेवाओं को सुगम बनाने पर जोर दिया गया।
जयपुर की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होंगे प्रतिनिधि
व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान आमंत्रित मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल जयपुर के सिटी पैलेस और हवा महल का सांस्कृतिक भ्रमण करेंगे। इसके जरिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा। तकनीकी सत्रों में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर विचार साझा किए जाएंगे।
डब्ल्यूटीओ केंद्रित नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था पर जोर
ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक भारत की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। यह विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को केंद्र में रखते हुए खुली, समावेशी, पारदर्शी, न्यायसंगत और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराएगी।
विकसित भारत@2047 के लक्ष्य से जुड़ा आर्थिक सहयोग
बैठक में मजबूत सप्लाई चेन, नवाचार आधारित विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एमएसएमई की भागीदारी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। भारत को उम्मीद है कि इस तरह का सहयोग ‘विकसित भारत@2047’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में योगदान देगा।