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डीपफेक पर सरकार का शिकंजा मजबूत, एआई कंटेंट की लेबलिंग अनिवार्य

नई दिल्ली ( राघवेंद्र प्रताप सिंह ) : शिकायतों के लिए अपील का प्रावधान मध्यस्थों के लिए शिकायत अधिकारी नियुक्त करना और निर्धारित समयसीमा में शिकायतों का समाधान करना अनिवार्य है। शिकायत अधिकारी से समाधान नहीं मिलने पर उपयोगकर्ता शिकायत अपीलीय समिति (जीएसी) के समक्ष ऑनलाइन अपील कर सकते हैं। यह व्यवस्था कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े निर्णयों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

पुलिस और राज्यों की भी अहम भूमिका

साइबर अपराधों की शिकायतों की जांच संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियां करती हैं। संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य के विषय हैं। इसलिए साइबर अपराध समेत अपराधों की रोकथाम, जांच, पता लगाने और अभियोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है।

भारत एआई मिशन के तहत डीपफेक डिटेक्शन

सरकार ने 5 नवंबर 2025 को भारत एआई प्रशासन दिशानिर्देश जारी किए थे। इनमें सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के विकास एवं इस्तेमाल के लिए जोखिम आधारित और अनुपातिक ढांचा प्रस्तावित किया गया है। भारत एआई मिशन के सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई स्तंभ के तहत देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में 13 जिम्मेदार एआई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें डीपफेक का पता लगाने वाली परियोजनाएं भी शामिल हैं।

आईआईटी में विकसित हो रही तकनीक

डीपफेक डिटेक्शन से जुड़ी पहलों में आईआईटी जोधपुर और आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क, ऑडियो-विजुअल जालसाजी पहचान प्रणाली और आईआईटी खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन प्रणाली शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य एआई-जनित फर्जी सामग्री की पहचान करने की क्षमता को मजबूत करना है।

आई4सी और सहयोग पोर्टल से समन्वय

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) राज्यों में साइबर अपराध से संबंधित कार्रवाई का समन्वय करता है। यह आईटी अधिनियम और आईटी नियमों के तहत डीपफेक सहित गैरकानूनी सामग्री हटाने या उस तक पहुंच रोकने के लिए नोटिस जारी करने में मदद करता है। आई4सी का सहयोग पोर्टल संबंधित सरकारी निकायों और अधिकृत एजेंसियों को मध्यस्थों को केंद्रीकृत तरीके से निष्कासन नोटिस भेजने की सुविधा देता है।

साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत

नागरिक साइबर अपराध से जुड़ी घटनाओं की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं। पोर्टल पर डीपफेक, वित्तीय धोखाधड़ी और सामग्री के दुरुपयोग से संबंधित शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। साइबर अपराध से संबंधित वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन भी उपलब्ध है।

समन्वय प्लेटफॉर्म से जांच को मजबूती

समन्वय प्लेटफॉर्म अपराधियों और अपराधों के बीच अंतरराज्यीय संबंधों का विश्लेषण कर साइबर धोखाधड़ी की जांच को मजबूत करता है। इसके ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल के जरिए अपराधियों और अपराध तंत्र के स्थानों का मानचित्रण किया जाता है। सरकार के अनुसार, अब तक इसके माध्यम से 12,987 आरोपियों की गिरफ्तारी, 1,51,984 आपराधिक संबंधों की पहचान और 70,584 साइबर जांच सहायता अनुरोध दर्ज किए गए हैं।

मध्यस्थों को जारी की गईं सलाह

सरकार ने सोशल मीडिया समेत सभी मध्यस्थों को आईटी अधिनियम और आईटी नियमों के तहत उचित सावधानी बरतने को लेकर कई सलाह जारी की हैं। 9 फरवरी 2026 को धार्मिक मामलों से संबंधित सूचनाओं के जिम्मेदार प्रबंधन पर सलाह जारी की गई। 16 मार्च 2026 को अपमानजनक, मानहानिकारक, आपत्तिजनक और भ्रामक कृत्रिम रूप से उत्पन्न सामग्री के निर्माण, प्रकाशन और प्रसार को लेकर सलाह दी गई।

बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरों पर एसओपी

बिना सहमति के अंतरंग तस्वीरों के ऑनलाइन प्रसार को रोकने के लिए 11 नवंबर 2025 को मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई थी। इसमें पीड़ितों, मध्यस्थों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश हैं, ताकि बिना सहमति साझा की गई अंतरंग या रूपांतरित तस्वीरों समेत ऐसी सामग्री के खिलाफ त्वरित और एकसमान कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

साइबर जागरूकता पर भी जोर

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय नागरिकों और तकनीकी साइबर समुदाय के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है। इनमें हर साल अक्टूबर में साइबर सुरक्षा जागरूकता माह, फरवरी के दूसरे मंगलवार को सुरक्षित इंटरनेट दिवस, 1 से 15 फरवरी तक स्वच्छता पखवाड़ा और हर महीने के पहले बुधवार को साइबर जागरूकता दिवस शामिल हैं।

डीपफेक पर सर्ट-इन की सलाह

भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सर्ट-इन) एआई से जुड़े खतरों और उनसे बचाव के उपायों पर नियमित रूप से दिशानिर्देश जारी करती है। इनमें डीपफेक से जुड़े खतरे भी शामिल हैं। सर्ट-इन अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया माध्यमों पर सुरक्षा संबंधी सुझाव, जागरूकता पोस्टर, इन्फोग्राफिक्स और वीडियो साझा करता है। नवंबर 2024 में भी उसने डीपफेक के खतरों और उनसे बचने के उपायों पर सलाह जारी की थी।