साइबर अपराध पर CBI का बड़ा प्रहार: अंतरराष्ट्रीय ‘टेक-सपोर्ट फ्रॉड’ रैकेट का पर्दाफाश, 4 मुख्य आरोपी गिरफ्तार
विवेक ओझा/ नई दिल्ली: डिजिटल युग में तेज़ी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ी और सफल कार्रवाई की है। सीबीआई ने एक अंतरराष्ट्रीय ‘टेक-सपोर्ट फ्रॉड’ (Tech-Support Fraud) सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए इसके 4 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह भारत में बैठकर अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों के नागरिकों को अपना निशाना बनाता था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब हो रही थी।
जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस रैकेट की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) बेहद शातिर थी। ये जालसाज़ विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर स्क्रीन पर ‘पॉप-अप’ संदेश भेजते थे, जिनमें उनके सिस्टम के हैक होने या वायरस से संक्रमित होने की फर्जी चेतावनी होती थी। इन संदेशों में एक टोल-फ्री नंबर दिया जाता था। जब घबराया हुआ यूज़र उस नंबर पर कॉल करता था, तो आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल या अन्य बड़ी टेक कंपनियों का अधिकृत ‘तकनीकी सहायक’ (Tech Support) बताकर बात करते थे। सिस्टम को ठीक करने के बहाने वे रिमोट एक्सेस लेते थे और फिर भारी-भरकम फीस के रूप में हज़ारों डॉलर ऐंठ लेते थे।
सीबीआई ने इन आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और फर्जी बैंक खातों के दस्तावेज़ ज़ब्त किए हैं, जिनके ज़रिए हवाला के माध्यम से विदेशी मुद्रा को भारत लाया जा रहा था। इस कार्रवाई को इंटरपोल और विदेशी जांच एजेंसियों (जैसे FBI) के साथ समन्वय में अंजाम दिया गया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में चल रहे ऐसे अवैध कॉल सेंटर्स पर नकेल कसना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि ये न केवल मासूम लोगों की गाढ़ी कमाई लूटते हैं, बल्कि आईटी हब के रूप में भारत की वैश्विक साख को भी गहरा नुकसान पहुंचाते हैं।