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राज्यसभा में विदेश मंत्रालय का खुलासा: प्रधानमंत्री मोदी की 77 विदेश यात्राओं पर सरकार ने खर्च किए 557.51 करोड़ रुपये

सरिता त्रिपाठी/ नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में देश की विदेश नीति और उच्च स्तरीय कूटनीतिक दौरों के खर्चों को लेकर एक अहम आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने राज्यसभा के पटल पर आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया है कि सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 77 विदेश यात्राओं पर कुल 557.51 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह जानकारी एक सांसद द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में दी गई।

इस 557.51 करोड़ रुपये के खर्च में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए चार्टर्ड उड़ानों (VVIP एयरक्राफ्ट), ठहरने (Accommodation), सुरक्षा व्यवस्थाओं और हॉटलाइन संचार (Secure Communication) सुविधाओं पर हुआ व्यय शामिल होता है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए राष्ट्राध्यक्षों की विदेश यात्राएं कूटनीतिक रूप से अत्यंत आवश्यक मानी जाती हैं।

सत्ता पक्ष के नेताओं और कूटनीतिक विशेषज्ञों का तर्क है कि इस खर्च को एक ‘निवेश’ के रूप में देखा जाना चाहिए। इन 77 विदेश यात्राओं के माध्यम से भारत ने संयुक्त राष्ट्र, G20, ब्रिक्स (BRICS), क्वाड (QUAD) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे वैश्विक मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इसके परिणामस्वरूप देश में भारी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है, रक्षा समझौते हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सॉफ्ट पावर (Soft Power) में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

दूसरी ओर, विपक्षी दल अक्सर इन खर्चों को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं। विपक्ष का आरोप रहता है कि एक तरफ देश में महंगाई और बेरोज़गारी बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ वीवीआईपी दौरों पर जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। हालांकि, विदेश मंत्रालय समय-समय पर यह स्पष्ट करता रहा है कि इन यात्राओं के बिना वैश्विक कूटनीति, द्विपक्षीय व्यापार और सामरिक संबंधों को मजबूत करना असंभव है। राज्यसभा में पेश किए गए इन पारदर्शी आंकड़ों ने देश में एक बार फिर कूटनीतिक खर्च बनाम घरेलू प्राथमिकताओं पर एक स्वस्थ लोकतांत्रिक बहस छेड़ दी है।