स्वदेशी और विरासत का जश्न: प्रधानमंत्री ने की ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ मनाने की अपील, बुनकरों को सशक्त बनाने पर दिया ज़ोर
इंडियन व्यू टीम/ नई दिल्ली: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एक विशेष अपील की है। प्रधानमंत्री ने लोगों से आग्रह किया है कि वे ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ (National Handloom Day) को उत्साह के साथ मनाएं। यह दिन भारतीय हथकरघा (Handloom) उद्योग के महत्व को पहचानने और देश के लाखों बुनकरों (Weavers) के अथक परिश्रम और उनकी कला को सम्मानित करने के लिए समर्पित है।
प्रत्येक वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस विशेष तारीख को चुनने के पीछे एक गहरा ऐतिहासिक कारण है। वर्ष 1905 में 7 अगस्त के दिन ही स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ ‘स्वदेशी आंदोलन’ (Swadeshi Movement) की शुरुआत हुई थी, जिसमें विदेशी कपड़ों का बहिष्कार कर स्वदेशी वस्तुओं और हथकरघा से बने कपड़ों को अपनाने का आह्वान किया गया था। प्रधानमंत्री की यह अपील उसी ऐतिहासिक स्वदेशी भावना को फिर से जीवंत करने का एक प्रयास है।
हथकरघा क्षेत्र भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कृषि के बाद रोज़गार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। इस उद्योग की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी 70 प्रतिशत से अधिक है, जो इसे महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा माध्यम बनाता है। प्रधानमंत्री का यह आग्रह सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के विजन के बिल्कुल अनुरूप है।
अपनी अपील के माध्यम से प्रधानमंत्री यह संदेश देना चाहते हैं कि जब आम नागरिक अपने दैनिक जीवन में, त्योहारों पर या उपहार देने के लिए खादी और हथकरघा से बने उत्पादों को खरीदते हैं, तो वे केवल एक कपड़ा नहीं खरीदते, बल्कि वे एक गरीब बुनकर के परिवार की आजीविका को सहारा देते हैं। सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न मार्केटिंग योजनाओं के जरिए इन उत्पादों को वैश्विक बाज़ार तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। हथकरघा दिवस मनाना हमारी जड़ों की ओर लौटने और देश के कारीगरों पर गर्व करने का एक शानदार अवसर है।