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अमेरिका में इमिग्रेशन पर ट्रंप का नया प्रहार

'बर्थराइट सिटिज़नशिप' और 'बर्थ टूरिज्म' को खत्म करने के लिए 2 कार्यकारी आदेशों पर किए हस्ताक्षर

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय आप्रवासन (Immigration) नीतियों में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कट्टर आप्रवासन नीतियों को और धार देते हुए दो बेहद विवादास्पद और ऐतिहासिक कार्यकारी आदेशों (Executive Actions) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन आदेशों का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में ‘जन्मसिद्ध नागरिकता’ (Birthright Citizenship) को सीमित करना और ‘बर्थ टूरिज्म’ (Birth Tourism) पर पूरी तरह से लगाम लगाना है। यह कदम दुनिया भर के उन प्रवासियों को सीधा प्रभावित करेगा जो अमेरिका जाने का सपना देखते हैं।

‘बर्थ टूरिज्म’ या ‘जन्म पर्यटन’ एक ऐसी प्रथा है जिसके तहत विदेशी गर्भवती महिलाएं मेडिकल वीज़ा या टूरिस्ट वीज़ा पर केवल इसलिए अमेरिका की यात्रा करती हैं ताकि वे अमेरिकी ज़मीन पर बच्चे को जन्म दे सकें। अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन (14th Amendment) के अनुसार, अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाले किसी भी बच्चे को स्वतः ही अमेरिका की नागरिकता (Jus Soli) मिल जाती है। राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से इस नियम को अमेरिका के संसाधनों का शोषण बताते रहे हैं।

नए आदेशों के तहत, अमेरिकी दूतावासों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी वीज़ा आवेदक की मंशा अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर उसे अमेरिकी नागरिक बनाने की पाई जाती है, तो उसका वीज़ा तुरंत खारिज कर दिया जाएगा। साथ ही, अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के बच्चों की स्वतः नागरिकता को कानूनी चुनौती देने का रास्ता भी खोला गया है।

इस फैसले का वैश्विक कूटनीति और डायस्पोरा पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। भारत, चीन और लैटिन अमेरिकी देशों से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका जाते हैं। हालांकि, नागरिक अधिकार संगठनों (Civil Rights Groups) और डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे असंवैधानिक करार दिया है। उनका तर्क है कि राष्ट्रपति अपने कार्यकारी आदेश (Executive Order) से संविधान के 14वें संशोधन को नहीं बदल सकते, इसके लिए संसद में पूर्ण बहुमत से संशोधन की आवश्यकता होती है। यह मामला अब सीधे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई का गवाह बनने जा रहा है, जो आगामी चुनावों की दिशा भी तय करेगा।