पश्चिम एशिया में प्रॉक्सी वॉर ने लिया खूनी रूप
यमन में सऊदी समर्थित सरकारी बलों पर हूतियों का बड़ा मिसाइल हमला, 58 सैनिकों की दर्दनाक मौत
सरिता त्रिपाठी/ सना / रियाद: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी दशकों पुराना संघर्ष एक बार फिर भड़क उठा है। यमन में युद्ध की विभीषिका के बीच एक बेहद घातक हमला हुआ है। सूत्रों के हवाले से मिली ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) द्वारा किए गए एक विनाशकारी मिसाइल हमले में सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों (Yemeni Government Forces) के कम से कम 58 सैनिक मारे गए हैं। यह हाल के महीनों में यमनी बलों पर हुआ सबसे बड़ा और प्राणघातक हमला है।
यह हमला उस सैन्य शिविर पर किया गया जहां सऊदी समर्थित सरकारी बलों के जवान प्रशिक्षण ले रहे थे या एकत्रित थे। हूतियों ने इस हमले के लिए उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलों और सशस्त्र ड्रोन्स का इस्तेमाल किया, जो सीधे तौर पर ईरान द्वारा उन्हें प्रदान की गई तकनीकी सैन्य सहायता को दर्शाता है। 58 सैनिकों की एक साथ मौत ने यमन में संयुक्त राष्ट्र (UN) की मध्यस्थता से चल रहे शांति प्रयासों और युद्धविराम (Ceasefire) की उम्मीदों को पूरी तरह से चकनाचूर कर दिया है।
यमन का गृहयुद्ध दरअसल सऊदी अरब और ईरान के बीच मध्य पूर्व में क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई यानी ‘प्रॉक्सी वॉर’ (Proxy War) का मुख्य अखाड़ा है। 2014 में जब शिया हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्ज़ा किया था, तब से सुन्नी बहुल सऊदी अरब एक सैन्य गठबंधन का नेतृत्व करते हुए हूतियों पर हमले कर रहा है।
भू-राजनीतिक (Geopolitical) दृष्टि से यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है क्योंकि यह लाल सागर (Red Sea) और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास स्थित है। हूतियों के इस भीषण हमले के बाद सऊदी गठबंधन द्वारा कड़े पलटवार की पूरी आशंका है, जिससे यमन में पहले से मौजूद दुनिया का सबसे खराब मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) और भी गहरा जाएगा। इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब तक क्षेत्रीय ताकतों के बीच सीधा समझौता नहीं होता, यमन में शांति एक कोरा सपना ही रहेगी।