जनरेशन Z (Gen Z) के मुद्दों पर RSS का बड़ा बयान: मोहन भागवत ने युवाओं की शिकायतों को बताया ‘जायज़’
सरिता त्रिपाठी/ नागपुर: देश के युवाओं, विशेषकर 1990 के दशक के अंत और 2010 के बीच जन्मे ‘जनरेशन Z’ (Gen Z) के असंतोष और उनकी बढ़ती बेचैनी को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एक बेहद महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। एक हालिया संबोधन में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि जनरेशन Z की शिकायतें पूरी तरह से वास्तविक और ‘जायज़’ हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब युवा वर्ग बेरोज़गारी, शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार (जैसे हालिया पेपर लीक मामले), भविष्य की अनिश्चितता और आर्थिक मंदी को लेकर सड़कों पर उतर रहा है। RSS, जिसे देश की राजनीति और समाज को वैचारिक दिशा देने वाला सबसे बड़ा संगठन माना जाता है, उसका इस तरह सीधे तौर पर Gen Z के दर्द को समझना एक बड़े रणनीतिक और सामाजिक बदलाव का संकेत है।
मोहन भागवत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज का युवा केवल वादों से संतुष्ट नहीं है, उसे ज़मीनी स्तर पर परिणाम चाहिए। डिजिटल युग में पला-बढ़ा यह वर्ग अत्यधिक जागरूक है और उसकी उम्मीदें बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। जब उन्हें अवसर नहीं मिलते, तो उनका निराश होना स्वाभाविक है। राजनीतिक पंडितों के अनुसार, RSS प्रमुख का यह बयान सत्ताधारी दल (BJP) के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि यदि युवाओं के इन बुनियादी मुद्दों (रोटी, रोज़गार और शिक्षा) का तुरंत समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। संगठन अब युवाओं को जोड़ने के लिए नए सिरे से संवाद की रणनीति बना रहा है।