बिग-टेक कंपनियों पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार
'पब्लिक न्यूसेंस' और बच्चों को नुकसान पहुंचाने के मामले में मेटा (Meta) पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना
सरिता त्रिपाठी/ वाशिंगटन डीसी: सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों, विशेषकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर अमेरिका में एक ऐतिहासिक कानूनी फैसला सुनाया गया है। एएफपी (AFP) की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) को अमेरिका के एक राज्य को ‘सार्वजनिक उपद्रव’ (public nuisance) को कम करने और बच्चों को हुए नुकसान (child harm) की भरपाई के लिए 567 मिलियन डॉलर (करीब 4,700 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
यह मामला इस आरोप पर आधारित था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक और इंस्टाग्राम) ने जानबूझकर ऐसे एल्गोरिदम (Algorithms) डिज़ाइन किए हैं जो बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया की लत (Addiction) का शिकार बनाते हैं। राज्य के वकीलों ने अदालत में सिद्ध किया कि इन फीचर्स (जैसे अनंत स्क्रॉलिंग और लगातार आने वाले नोटिफिकेशंस) के कारण बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, ईटिंग डिसऑर्डर और आत्महत्या की प्रवृत्तियां तेज़ी से बढ़ी हैं।
इस कानूनी फैसले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि अदालत ने सोशल मीडिया की लत को एक ‘पब्लिक न्यूसेंस’ (सार्वजनिक उपद्रव/खतरा) माना है—यह वही कानूनी ढांचा है जिसका इस्तेमाल दशकों पहले तंबाकू (Tobacco) और फार्मा कंपनियों (Opioid crisis) पर जुर्माना लगाने के लिए किया गया था। इस 567 मिलियन डॉलर के जुर्माने से न केवल मेटा को बड़ा आर्थिक झटका लगा है, बल्कि यह दुनिया भर की सरकारों के लिए एक मिसाल बन गया है। इस फैसले के बाद मेटा को अपने प्लेटफॉर्म्स पर ‘चाइल्ड सेफ्टी’ के लिए कड़े बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।