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‘केवल आश्वासन काफी नहीं, कानूनी स्पष्टता चाहिए’

मेघालय के भाजपा विधायक ने FCRA बिल पर अपनी ही सरकार से मांगे लिखित जवाब

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ शिलॉन्ग / नई दिल्ली: FCRA संशोधन बिल को लेकर केवल विपक्षी दल ही नहीं, बल्कि अब पूर्वोत्तर राज्यों में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर से भी चिंता के स्वर उठने लगे हैं। एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में, मेघालय से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ठ विधायक ने अपनी ही केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे FCRA बिल को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि गृह मंत्री द्वारा अल्पसंख्यक संगठनों को दिए गए केवल ‘मौखिक आश्वासन’ पर्याप्त नहीं हैं।

मेघालय जैसे ईसाई बहुल राज्य में, जहाँ कई स्कूल, अस्पताल और सामाजिक संस्थाएं विदेशी चर्चों और संस्थाओं से मिलने वाले अनुदान (Foreign Aid) पर निर्भर हैं, इस बिल को लेकर भारी घबराहट का माहौल है। भाजपा विधायक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पूर्वोत्तर की भौगोलिक और सामाजिक वास्तविकताएं देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार को बिल के मसौदे में ही कानूनी रूप से यह स्पष्टता (Legal Clarity) देनी चाहिए कि जन कल्याण और धर्मार्थ कार्यों में लगे ईसाई संगठनों को अकारण परेशान नहीं किया जाएगा।

यह बयान इस बात का संकेत है कि पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय क्षत्रप और स्थानीय नेता अपने वोट बैंक और सामाजिक ताने-बाने को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री ने ईसाई निकायों को आश्वासन दिया था कि यह बिल ‘धर्म-निरपेक्ष’ है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं का मानना है कि जब तक कानून के पन्नों पर सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी, तब तक ब्यूरोक्रेसी (नौकरशाही) नियमों का मनमाना इस्तेमाल कर सकती है। इस असंतोष ने केंद्र सरकार के लिए एक नई कूटनीतिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है, जिसे साधने के लिए पार्टी आलाकमान को मशक्कत करनी पड़ेगी।