NEET-UG 2026 पेपर लीक का नया खुलासा
डिजिटल सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने किया 'हाथ से लिखे नोट्स' और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल
विवेक ओझा/ नई दिल्ली/ पटना: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसियों (CBI) ने परीक्षा माफियाओं के काम करने के तरीके (Modus Operandi) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस और साइबर सेल की नज़रों से बचने और डिजिटल फुटप्रिंट मिटाने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए थे। उन्होंने हाई-टेक और लो-टेक दोनों तरीकों का एक घातक मिश्रण तैयार किया था।
सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सरगनाओं ने प्रश्न पत्र लीक करने के बाद उसकी मूल कॉपी या पीडीएफ (PDF) फाइल को सीधे फॉरवर्ड करने से परहेज़ किया, क्योंकि इससे वॉटरमार्क या डिजिटल ट्रैकिंग का खतरा था। इसके बजाय, उन्होंने चुनिंदा प्रश्नों और उनके उत्तरों को सादे कागज़ पर हाथ से लिखा (Handwritten notes)। इसके बाद, इन हस्तलिखित पन्नों की तस्वीरें खींची गईं और उन्हें छात्रों व सॉल्वर गैंग के गुर्गों तक पहुंचाने के लिए ‘टेलीग्राम’ (Telegram) और ‘सिग्नल’ (Signal) जैसे अत्यधिक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया गया।
इन मैसेजिंग ऐप्स में ‘डिसअपीयरिंग मैसेजेस’ (Disappearing messages) का फीचर चालू रखा गया था, ताकि परीक्षा खत्म होने के कुछ ही समय बाद सारे संदेश अपने आप डिलीट हो जाएं और जांच एजेंसियों के हाथ कोई पुख्ता सबूत न लगे। हालांकि, फोरेंसिक विशेषज्ञों ने गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन से डेटा रिकवर करने में सफलता हासिल कर ली है, जिससे इस नेटवर्क की कई अहम कड़ियां जुड़ रही हैं। यह नया खुलासा दर्शाता है कि शिक्षा माफिया अब तकनीकी रूप से कितने उन्नत और चालाक हो गए हैं, जो परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं (NTA) की साइबर सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।