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राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम ग्रीन एनर्जी: गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, अंतरराष्ट्रीय सीमा के 1 किमी के दायरे में नहीं लगेंगे कोई भी सोलर या विंड प्रोजेक्ट्स

विवेक ओझा/ नई दिल्ली: भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) और आधारभूत ढांचे की निगरानी को चाक-चौबंद करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक बेहद सख्त और रणनीतिक दिशानिर्देश जारी किया है। नए आदेशों के अनुसार, भारत की किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border) के 1 किलोमीटर के दायरे में अब कोई भी नई सौर ऊर्जा (Solar), पवन ऊर्जा (Wind) या अन्य अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) परियोजना स्थापित नहीं की जा सकेगी।

यह निर्णय मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य खुफिया एजेंसियों द्वारा उठाई गई गंभीर चिंताओं के बाद लिया गया है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब लगाए जाने वाले विशालकाय पवन चक्कियों (Wind Turbines) और बड़े सोलर पैनल ग्रिड्स के कारण सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की ‘दृश्यता’ (Line of sight) बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके अलावा, इन भारी धात्विक संरचनाओं और उनसे उत्पन्न होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के कारण सेना और सीमा प्रहरियों के रडार सिस्टम (Radar Systems), रेडियो संचार और ड्रोन निगरानी उपकरणों में भारी तकनीकी बाधा (Interference) पैदा होती है।

राजस्थान, गुजरात और पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य, जो भारत के सबसे बड़े सौर और पवन ऊर्जा उत्पादक हैं, इस फैसले से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। हालांकि सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW अक्षय ऊर्जा उत्पादन का है, लेकिन मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि हरित ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देश की बाहरी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

रक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। पाकिस्तान और चीन जैसी संवेदनशील सीमाओं पर जहां घुसपैठ, ड्रोन्स के ज़रिए हथियारों की तस्करी और स्नाइपर हमलों का खतरा हमेशा बना रहता है, वहां सुरक्षा उपकरणों का 100% सटीकता के साथ काम करना अनिवार्य है। सरकार अब सीमावर्ती राज्यों के साथ मिलकर इन परियोजनाओं के लिए सुरक्षित ‘बैक-ज़ोन’ (सीमा से दूर वैकल्पिक ज़मीन) चिन्हित करने पर काम कर रही है, ताकि सुरक्षा और विकास के बीच एक सही रणनीतिक संतुलन (Strategic Balance) स्थापित किया जा सके।