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डिजिटल भुगतान पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण

आम यूज़र्स के लिए पूरी तरह फ्री रहेगा UPI, व्यापारियों के बड़े वर्ग पर भी नहीं लगेगा कोई शुल्क

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ नई दिल्ली: भारत में तेज़ी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट और नकद रहित अर्थव्यवस्था (Cashless Economy) को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत देने वाला बयान जारी किया है। सरकार ने सोशल मीडिया और मीडिया हलकों में चल रही उन सभी अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य शुल्क लगाए जाने वाले हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों (Consumers) के लिए यूपीआई पूरी तरह से मुफ्त रहेगा और व्यापारियों (Merchants) के एक बहुत बड़े वर्ग के लिए भी अधिकांश लेनदेन शुल्क-मुक्त रहेंगे।

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने में डिजिटल भुगतान की पहुंच को और अधिक मजबूत करना है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कभी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुरू भी किया जाता है, तो वह केवल एक निश्चित सीमा (Threshold) से अधिक मूल्य वाले बड़े व्यापारिक लेनदेन के सीमित सेट पर ही लागू होगा। इसके साथ ही, यदि ऐसा कोई शुल्क लगाया भी जाता है, तो उसकी दर बेहद मामूली (Nominal) होगी, जो पारंपरिक डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR शुल्कों की तुलना में काफी कम होगी।

सरकार के इस कदम ने देश के करोड़ों छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और आम उपभोक्ताओं के बीच फैली घबराहट को पूरी तरह से शांत कर दिया है। गौरतलब है कि जुलाई 2026 में ही यूपीआई लेनदेन ने नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। आज सब्जी वाले से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स तक, हर वर्ग डिजिटल पेमेंट्स पर निर्भर हो चुका है। ऐसे में यदि यूपीआई पर कोई शुल्क लगाया जाता, तो लोग दोबारा नकद (Cash) लेनदेन की ओर लौट सकते थे, जिससे सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को बड़ा झटका लगता।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यूपीआई को मुफ्त रखने की नीति से भारतीय अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आई है और अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) मुख्यधारा की बैंकिंग प्रणाली से जुड़ा है। सरकार डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटरों को पहले की तरह ही वित्तीय प्रोत्साहन (Financial Subsidies) देती रहेगी, ताकि बैंकों को वित्तीय नुकसान भी न हो और देश में कैशलेस क्रांति की रफ्तार भी सुचारू रूप से बनी रहे।