संसद मानसून सत्र: लोकसभा में ‘अधिकरण सुधार बिल 2026’ और राज्यसभा में ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल’ पारित, न्याय और बैंकिंग प्रणाली में होंगे बड़े बदलाव
राघवेंद्र प्रताप सिंह/नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे के बीच विधायी कार्यों (Legislative Business) में भी अहम प्रगति देखने को मिल रही है। ताज़ा घटनाक्रम में, संसद के दोनों सदनों ने न्यायपालिका और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े दो बेहद महत्वपूर्ण विधेयकों को अपनी मंज़ूरी दे दी है। लोकसभा में जहाँ ‘अधिकरण सुधार विधेयक, 2026’ (Tribunals Reforms Bill, 2026) ध्वनि मत से पारित हो गया, वहीं राज्यसभा ने ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026′ (Bankers’ Books Evidence Bill, 2026) पर अपनी मुहर लगा दी है।
‘अधिकरण सुधार विधेयक, 2026’ का मुख्य उद्देश्य देश में चल रहे विभिन्न अपीलीय अधिकरणों (Appellate Tribunals) के ढांचे को युक्तिसंगत (Rationalise) बनाना और उनके कामकाज में तेज़ी लाना है। पिछले कुछ वर्षों में कई ट्रिब्यूनल्स में जजों की भारी कमी और मामलों के अंबार के कारण न्याय मिलने में अत्यधिक देरी हो रही थी। इस नए बिल के माध्यम से सरकार कुछ अनावश्यक ट्रिब्यूनल्स को समाप्त कर उनके अधिकार क्षेत्र को सीधे उच्च न्यायालयों (High Courts) या वाणिज्यिक अदालतों को सौंपने का प्रयास कर रही है, ताकि वादियों (Litigants) को त्वरित न्याय मिल सके और सरकारी खज़ाने पर बोझ कम हो।
दूसरी ओर, राज्यसभा से पारित ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ भारत के बैंकिंग परिदृश्य को पूरी तरह से डिजिटल युग के अनुरूप ढालने का एक ऐतिहासिक कदम है। मूल कानून ब्रिटिश काल का था, जो केवल कागज़ी दस्तावेज़ों को अदालत में साक्ष्य मानता था। इस नए संशोधन के बाद, बैंकों द्वारा रखे गए डिजिटल रिकॉर्ड्स, क्लाउड डेटा, ब्लॉकचेन एंट्रीज़ और इलेक्ट्रॉनिक लेज़र को अदालतों में प्राथमिक साक्ष्य (Primary Evidence) के रूप में पूर्ण कानूनी मान्यता मिल जाएगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं (Polity & Economy) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इन दोनों बिलों का अध्ययन अति आवश्यक है। जहां एक बिल प्रशासनिक न्याय प्रणाली (Administrative Justice) में सुधार करता है, वहीं दूसरा बिल वित्तीय धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों से निपटने में जांच एजेंसियों और अदालतों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाएगा।