भारत-बांग्लादेश संबंधों में आया बड़ा भूचाल
बढ़ते तनाव के बीच भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने की प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात
सरिता त्रिपाठी/ ढाका / नई दिल्ली: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) और भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी प्रथम) नीति के लिए एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे भारी राजनयिक तनाव के बीच, ढाका में नियुक्त भारत के उच्चायुक्त (High Commissioner) दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tarique Rahman) से आधिकारिक मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के दशकों पुराने प्रगाढ़ संबंधों में एक अविश्वास की बड़ी खाई पैदा हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) के परिप्रेक्ष्य में इस घटनाक्रम को समझना बेहद ज़रूरी है। बांग्लादेश की सत्ता में एक बड़ा परिवर्तन (Regime Change) हुआ है। शेख हसीना (आवामी लीग) की सरकार, जिसे भारत का करीबी सहयोगी माना जाता था, के सत्ता से बाहर होने के बाद अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के शीर्ष नेता तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली है। BNP का पारंपरिक रूप से भारत के प्रति रुख सख्त और पाकिस्तान व चीन के प्रति अधिक झुकाव वाला माना जाता रहा है।
हाल के हफ्तों में सीमा विवाद, तीस्ता जल बंटवारे, और सीमा पार से होने वाली कथित घुसपैठ को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाज़ी तेज़ हुई थी। इसी तनाव को कम करने और नए नेतृत्व के साथ एक ‘वर्किंग रिलेशनशिप’ (व्यावहारिक संबंध) स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने पीएम तारिक रहमान से यह अहम कूटनीतिक मुलाकात की है।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में भारत ने स्पष्ट किया है कि वह बांग्लादेश के लोकतांत्रिक और आंतरिक मामलों का सम्मान करता है, लेकिन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। नई दिल्ली यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बांग्लादेश की ज़मीन का इस्तेमाल किसी भी भारत-विरोधी विद्रोही गुट या आतंकी संगठन द्वारा न किया जाए। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच ‘बर्फ पिघलाने’ (Ice-breaking) की दिशा में पहला कदम मानी जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया (विशेषकर चीन और अमेरिका) की गहरी नज़र है।