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मणिपुर हिंसा में न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम

सुप्रीम कोर्ट ने CBI और NIA मामलों की सुनवाई के लिए 'विशेष अदालतों' का दिया प्रस्ताव

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली: मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा (Ethnic Violence) और उसके बाद उत्पन्न हुए मानवीय व कानूनी संकट के समाधान की दिशा में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एक बेहद अहम और निर्णायक हस्तक्षेप किया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मणिपुर हिंसा से जुड़े उन सभी अति-संवेदनशील मामलों की सुनवाई के लिए ‘विशेष अदालतों’ (Special Courts) के गठन का प्रस्ताव रखा है, जिनकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) कर रहे हैं।

शीर्ष अदालत का यह प्रस्ताव इस चिंता पर आधारित है कि राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच मौजूद गहरी जातीय खाई के कारण स्थानीय अदालतों में निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई (Fair and Speedy Trial) प्रभावित हो सकती है। गवाहों को डराने-धमकाने, सबूतों से छेड़छाड़ और स्थानीय दबाव की आशंकाओं को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यह विचार रखा है कि इन मामलों को विशेष रूप से नामित न्यायाधीशों के समक्ष रखा जाए। अदालत ने यह भी सुझाव दिया है कि यदि आवश्यक हो, तो इन विशेष अदालतों की कार्यवाही को असम या किसी अन्य पड़ोसी राज्य में स्थानांतरित किया जा सकता है या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुरक्षित सुनवाई सुनिश्चित की जा सकती है।

कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों (Constitutional Experts) के अनुसार, अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत एक ‘निष्पक्ष सुनवाई’ हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। जब राज्य की कानून-व्यवस्था की मशीनरी (Law and order machinery) पूरी तरह से ध्वस्त हो जाती है, तो न्यायपालिका का यह कर्तव्य बन जाता है कि वह असाधारण उपाय करे। CBI महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों (जैसे यौन उत्पीड़न और हत्या) की जांच कर रही है, जबकि NIA सीमा पार से हथियारों की तस्करी और राष्ट्र-विरोधी साज़िशों की जांच कर रही है।

केंद्र सरकार और मणिपुर राज्य सरकार को अब शीर्ष अदालत के इस प्रस्ताव पर अपना जवाब दाखिल करना है। सुप्रीम कोर्ट की यह पहल न केवल मणिपुर के पीड़ितों में न्याय प्रणाली के प्रति विश्वास बहाल करेगी, बल्कि यह भविष्य में किसी भी राज्य में होने वाले बड़े पैमाने के दंगों के दौरान न्यायिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत कानूनी नज़ीर (Precedent) भी स्थापित करेगी।