झारखंड में बेकाबू हुआ छात्रों का गुस्सा
विधानसभा परिसर तक पहुंचे हज़ारों प्रदर्शनकारी, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले और दागी वाटर कैनन
सरिता त्रिपाठी/ रांची: झारखंड में राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन अब उग्र और हिंसक रूप ले चुका है। ताज़ा ‘लाइव’ घटनाक्रम के अनुसार, राज्य की राजधानी रांची में हज़ारों की संख्या में उग्र छात्रों ने पुलिस की कई लेयर की बैरिकेडिंग को तोड़ दिया है और वे सीधे झारखंड राज्य विधानसभा (State Assembly) परिसर के मुहाने तक पहुंच गए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भारी बल प्रयोग करना पड़ा है।
द हिंदू ब्यूरो की लाइव रिपोर्टिंग के अनुसार, जैसे ही छात्रों की भारी भीड़ ने ‘न्याय मार्च’ निकालते हुए विधानसभा की ओर कूच किया, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। जब छात्र नहीं माने और पुलिस से उनकी तीखी झड़प हुई, तो दंगा नियंत्रण बलों (Riot Control Police) ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस (Tear Gas) के कई गोले दागे और वाटर कैनन (Water Cannons) का इस्तेमाल किया। इस हिंसक झड़प में कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है, जिन्हें एंबुलेंस के ज़रिए नज़दीकी अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
यह घटनाक्रम इस बात का सबूत है कि कल छात्रों और सरकार के बीच बातचीत के लिए जिस ’11 सदस्यीय टीम’ का गठन किया गया था, वह ज़मीनी स्तर पर छात्रों के गुस्से को शांत करने में पूरी तरह से विफल रही है। छात्रों का स्पष्ट आरोप है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और अन्य भर्ती बोर्ड पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं और सरकार केवल जांच समितियों का झुनझुना पकड़ाकर मामले को टालना चाहती है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली जेएमएम-कांग्रेस (JMM-Congress) गठबंधन सरकार के लिए एक बड़ा ‘लॉ एंड ऑर्डर’ (कानून-व्यवस्था) संकट बन गया है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के मुद्दे उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ उसके अपने गठबंधन वाले राज्य में युवाओं पर लाठियां बरस रही हैं। विपक्षी दल (विशेषकर भाजपा) इस मुद्दे को भुनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और सरकार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राज्य प्रशासन ने रांची के कई संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू कर दी है और अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है।