कांवड़ यात्रा मार्गों पर प्रशासन की सख्ती: बरेली में मांसाहारी भोजन बेचने पर 4 हिरासत में, दो दुकानें की गईं ज़मींदोज़
राघवेंद्र प्रताप सिंह बरेली / लखनऊ:उत्तर प्रदेश में चल रहे पवित्र सावन माह और कांवड़ यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था और धार्मिक आस्था के सम्मान को लेकर राज्य प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। बरेली ज़िले के बहेड़ी (Bahedi) इलाके में कांवड़ यात्रियों के लिए निर्धारित मार्गों पर कथित रूप से मांसाहारी भोजन (Non-vegetarian food) बेचने के आरोप में पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो दुकानों को ध्वस्त (Demolished) कर दिया है।
यह पुलिसिया और प्रशासनिक कार्रवाई कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई सावन के चल रहे महीने के दौरान व्यापारियों को मांस, चिकन और मछली न बेचने की पूर्व चेतावनियों और बढ़ाई गई निगरानी (Increased surveillance) के बाद की गई है। स्थानीय प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे कि जिन रास्तों से लाखों कांवड़िए गंगाजल लेकर गुज़रते हैं, वहां खुले में या अवैध रूप से मांस की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी ताकि किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक तनाव या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचने से रोका जा सके।
यह मामला ‘कानून व्यवस्था बनाए रखने’ और ‘प्रशासनिक आदेशों के अनुपालन’ का एक ज्वलंत उदाहरण है। त्योहारों के दौरान जब लाखों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर होते हैं, तो ज़रा सी भी लापरवाही बड़े सांप्रदायिक तनाव (Communal tension) का रूप ले सकती है। हालांकि, कुछ मानवाधिकार संगठन दुकानों पर बुलडोज़र की कार्रवाई को ‘अत्यधिक बल प्रयोग’ भी कह सकते हैं, लेकिन पुलिस का तर्क है कि बार-बार दी गई चेतावनियों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश देना शांति व्यवस्था (Peace keeping) के लिए अनिवार्य था।