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दूध में मिलावट का खेल होगा खत्म

महाराष्ट्र FDA ने लॉन्च किया डिजिटल 'एंड-टू-एंड ट्रैसेबिलिटी' प्रोजेक्ट, पशुओं से जुड़ेगा रिकॉर्ड

इंडियन व्यू टीम/ मुंबई / पुणे: दूध और दुग्ध उत्पादों में होने वाली जानलेवा मिलावट (Adulteration) से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने तकनीक का एक शानदार उपयोग शुरू किया है। महाराष्ट्र का खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) दूध में होने वाली लगातार मिलावट से निपटने के लिए एक बड़ी डिजिटलीकरण पहल (Digitization initiative) शुरू कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य दूध के उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में ‘एंड-टू-एंड ट्रैसेबिलिटी’ (End-to-end traceability) स्थापित करना है।

इस नई और आधुनिक प्रणाली के तहत, दूध दुहने (Milking) के रिकॉर्ड को पूरी तरह से डिजिटल किया जाएगा और उसे सीधे दुधारू पशुओं (Milch animals) के डेटा के साथ जोड़ा जाएगा। इस तकनीकी एकीकरण से सरकारी अधिकारियों को वास्तविक दूध उत्पादन (Real milk output) की निगरानी करने में मदद मिलेगी। सरल शब्दों में, यदि किसी डेयरी फार्म में 100 लीटर दूध का उत्पादन दर्ज है, लेकिन वह बाज़ार में 150 लीटर बेच रहा है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट कर देगा कि अतिरिक्त 50 लीटर में पानी, यूरिया या सिंथेटिक रसायनों की मिलावट की गई है।

जनस्वास्थ्य (Public Health) और ई-गवर्नेंस (e-Governance) के दृष्टिकोण से महाराष्ट्र FDA की यह पहल एक ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकती है। दूध, जो बच्चों और परिवारों के पोषण का मुख्य आधार है, उसमें मिलावट एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या रही है। ‘ब्लॉकचेन’ (Blockchain) या इसी तरह की पारदर्शी डिजिटल लेज़र तकनीक का उपयोग करके आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को सुरक्षित करना, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में एक क्रांतिकारी कदम है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है, तो इसे पूरे भारत में लागू करने की मांग ज़ोर पकड़ सकती है।