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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोज़गार का भविष्य

IIT-मद्रास के निदेशक ने कहा- 'AI नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नए अवसर पैदा करेगा'

अभिषेक सिंह/ कोयंबटूर / चेन्नई: पूरी दुनिया में इस बात को लेकर एक बड़ी बहस और डर का माहौल है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसानों की नौकरियां छीन लेगा? इस डर को दूर करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी ने एक बेहद सकारात्मक और तार्किक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नौकरी के अवसरों को कम नहीं करेगा, बल्कि यह नए रोज़गार पैदा करेगा।

अपनी बात को सिद्ध करने के लिए उन्होंने बैंकों में इस्तेमाल होने वाली ‘नोट गिनने की मशीनों’ (Cash counting machines) का एक बेहतरीन उदाहरण दिया। जिस तरह कैश काउंटिंग मशीनों के आने से बैंक कर्मचारियों की नौकरियां नहीं गईं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता (Efficiency) बढ़ी और बैंकों का विस्तार हुआ, ठीक उसी तरह AI भी इंसानों के लिए एक ‘सहायक उपकरण’ (Assistive tool) के रूप में काम करेगा।

एक पूर्व छात्र कार्यक्रम (Alumni event) में बोलते हुए, आईआईटी-एम निदेशक ने संस्थान की चल रही AI प्रशिक्षण पहलों, विशेष रूप से “सभी के लिए एआई” (AI for all) कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। उन्होंने ग्रामीण छात्रों को शिक्षा प्रदान करने में टियर-II (Tier-II) शहरों की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया, जो सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ (Viksit Bharat 2047) के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के बिल्कुल अनुरूप है।

चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) के इस दौर में AI एक विघटनकारी (Disruptive) तकनीक ज़रूर है, लेकिन यह केवल ‘रूटीन’ और दोहराव वाले कार्यों (Repetitive tasks) को खत्म करेगी। इसके बदले में डेटा एनालिसिस, एआई एथिक्स, मशीन लर्निंग और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे नए क्षेत्रों में लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी। असली चुनौती नौकरियां बचाने की नहीं, बल्कि युवाओं को नई तकनीकों के लिए ‘अपस्किल’ (Upskill) करने की है, जिसमें टियर-2 और टियर-3 शहर भविष्य के बड़े केंद्र बनेंगे।