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भारतीय जनसांख्यिकी में नया अध्याय

17 अगस्त से लद्दाख करेगा स्वतंत्र भारत की पहली 'जातिगत गणना' (Caste Enumeration) का नेतृत्व

विवेक ओझा/ लेह / नई दिल्ली: भारत के सामाजिक-राजनीतिक और सांख्यिकीय इतिहास में एक बेहद ऐतिहासिक क्षण आने वाला है। ‘मॉर्निंग डाइजेस्ट’ की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख आगामी जनगणना में भारत की पहली ‘जातिगत गणना’ (Caste enumeration) का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है। स्वतंत्र भारत के इतिहास की इस पहली आधिकारिक जाति आधारित जनगणना प्रक्रिया की शुरुआत इसी महीने 17 अगस्त से होने जा रही है।

यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति और नीति-निर्माण (Policy-making) के लिहाज़ से एक ‘वाटरशेड मोमेंट’ (ऐतिहासिक मोड़) है। वर्ष 1931 के बाद से भारत की आधिकारिक राष्ट्रीय जनगणना में कभी भी अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा अन्य जातियों (जैसे OBC) का विस्तृत डेटा एकत्र नहीं किया गया था। यद्यपि 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) कराई गई थी, लेकिन उसके जातिगत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए थे।

लद्दाख, जो सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से एक बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, को इस बड़े राष्ट्रीय अभ्यास (National Exercise) का नेतृत्व करने के लिए चुना जाना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। जातिगत जनगणना एक बेहद अहम विषय है,इसके समर्थक तर्क देते हैं कि मंडल आयोग (Mandal Commission) और आरक्षण की नीतियों को तर्कसंगत बनाने के लिए सटीक और वैज्ञानिक डेटा की आवश्यकता है, ताकि ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ के सिद्धांत को ज़मीन पर उतारा जा सके। लद्दाख से शुरू हो रही यह प्रक्रिया भविष्य में पूरे देश के संसाधनों के बंटवारे और सामाजिक न्याय की नीतियों की दिशा तय करेगी।