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कोलंबिया में कुदरत का भीषण प्रहार: विनाशकारी भूकंप में 100 से ज्यादा लोगों की मौत, मलबे के नीचे अपनों को तलाश रही हैं सिसकती आंखें

राघवेंद्र प्रताप सिंह/बोगोटा: दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। देश के एक बड़े हिस्से में आए एक बेहद शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक रिपोर्टों और बचाव एजेंसियों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और यह आंकड़ा लगातार बढ़ने की आशंका है। इस वक्त पूरा कोलंबिया शोक, दहशत और एक बड़े मानवीय संकट के साये में है।

भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं, सड़कें फट गईं और पुल ज़मींदोज़ हो गए। सबसे ज़्यादा तबाही भूकंप के केंद्र (Epicenter) के आस-पास के घनी आबादी वाले इलाकों में हुई है। घटना के तुरंत बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। जैसे ही धरती का कांपना बंद हुआ, जीवित बचे लोग अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को मलबे में तलाशने के लिए नंगे हाथों से ही कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े हटाने लगे। यह दृश्य बेहद हृदयविदारक है।

राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। कोलंबियाई सेना, आपदा प्रबंधन बल और हज़ारों स्वयंसेवक मलबे में दबी जिंदगियों को बचाने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। स्निफर डॉग्स और भारी मशीनों की मदद से ‘सर्च एंड रेस्क्यू’ ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि, लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण बचाव दलों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई प्रभावित इलाकों में बिजली, पानी और संचार सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं, जिससे वहां फँसे लोगों से संपर्क करना लगभग नामुमकिन हो गया है।

कोलंबिया सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकाल की घोषणा कर दी है और बेघर हुए हज़ारों लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस दुखद घड़ी में कोलंबिया की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। कई देशों ने अपनी विशेष राहत टीमें, मेडिकल किट और आर्थिक सहायता भेजने की घोषणा की है। इस भूकंप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रकृति के प्रकोप के आगे इंसान कितना बेबस है।