रक्षक ही बने भक्षक: महाराष्ट्र में बेटे की चाहत कैसे दे रही है ‘कन्या भ्रूण हत्या’ के खौफनाक काले कारोबार को बढ़ावा?
इंडियन व्यू टीम/ मुंबई / पुणे: भारत 21वीं सदी में चाहे कितनी भी तरक्की कर ले, लेकिन समाज की कुछ कड़वी और शर्मनाक सच्चाइयां आज भी हमारा पीछा नहीं छोड़ रही हैं। महाराष्ट्र से एक बेहद विचलित करने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने राज्य में चोरी-छिपे चल रहे ‘कन्या भ्रूण हत्या’ (Female Foeticide) के खौफनाक रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि कैसे ‘बेटे की चाहत’ की सामाजिक कुरीति आज भी कुछ लालची डॉक्टरों और दलालों की जेबें भर रही है।
सबसे चौंकाने वाली और शर्मनाक बात यह है कि इस गोरखधंधे में वो लोग शामिल पाए गए हैं, जिन पर जीवन बचाने और कानून लागू करने की ज़िम्मेदारी थी। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में ‘रक्षक ही भक्षक’ बन गए हैं। कुछ भ्रष्ट चिकित्सा पेशेवर (Doctors) अल्ट्रासाउंड मशीनों का अवैध रूप से उपयोग करके लिंग परीक्षण (Sex determination) कर रहे हैं और गर्भ में पल रही बच्ची की पहचान होने पर उसकी हत्या (गर्भपात) कर रहे हैं।
भारत में पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट के तहत जन्म से पहले लिंग की जांच करना और कन्या भ्रूण हत्या करना एक गंभीर और गैर-ज़मानती अपराध है। लेकिन महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में यह काला बाज़ार पूरी तरह से एक संगठित सिंडिकेट (Racket) का रूप ले चुका है। दलाल उन परिवारों को निशाना बनाते हैं जिन पर एक ‘वारिस’ (बेटा) पैदा करने का सामाजिक दबाव होता है। इसके एवज़ में मोटी रकम वसूली जाती है।
हाल ही में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त छापेमारी में कई अवैध क्लीनिकों को सील किया गया है और कुछ डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह महज़ हिमशैल का सिरा (Tip of the iceberg) है। जब तक समाज में लड़कियों को लड़कों के बराबर दर्ज़ा नहीं दिया जाएगा और दहेज जैसी प्रथाओं का अंत नहीं होगा, तब तक महज़ पुलिसिया कार्रवाई से इन अवैध क्लीनिकों के शटर स्थायी रूप से बंद नहीं किए जा सकते। यह रिपोर्ट हम सभी के लिए एक गंभीर आत्ममंथन का विषय है।